जनसुनवाई में पहुंचे 25 मामले, डीएम ने दिये त्वरित निष्पादन के निर्देश

जनसुनवाई में आए आवेदकों की समस्याओं को डीएम ने गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सभी मामलों का निष्पादन निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से किया जाए, ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके.

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट:

मधेपुरा: समाहरणालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में सोमवार को आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लोगों ने अपनी समस्याएं और मांगें डीएम के समक्ष रखीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने की. इस दौरान कुल 25 मामलों की सुनवाई की गई.

जनसुनवाई में आए आवेदकों की समस्याओं को डीएम ने गंभीरता से सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि सभी मामलों का निष्पादन निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से किया जाए, ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके.

डीएम ने कहा कि जिला प्रशासन सुशासन, जवाबदेही और जनकल्याण की भावना के साथ कार्य कर रहा है. जनसुनवाई आम जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है, जिसके माध्यम से समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनसुनवाई से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब न हो. जिला प्रशासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण, पारदर्शिता और जनसहभागिता को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >