मधेपुरा को भी चाहिये केंद्रीय विद्यालय एवं गजेटियर

जिसके 25 वर्ष बाद मधेपुरा से अलग कर सुपौल को वर्ष 1870 में अनुमंडल बनाया गया

मधेपुरा. जिला स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह के दौरान बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री सह आलमनगर विधायक नरेंद्र नारायण यादव, सिंहेश्वर विधायक चंद्रहास चौपाल, प्रभारी जिला पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त अवधेश कुमार आनंद एवं एडीएम अरुण कुमार सिंह समेत उपस्थित अन्य अधिकारियों से समाजसेवी-साहित्यकार डा भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने जिले में केंद्रीय विद्यालय खोलने एवं अपना गजेटियर होने की मांग की. डा भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने जिला स्थापना के इतिहास की प्रस्तुति किये जाने के क्रम में जनप्रतिनिधियों एवं आलाधिकारियों से मधेपुरा जिला में शीघ्रातिशीघ्र केंद्रीय विद्यालय खोलने एवं अपना गजेटियर होने की मांग की. डा भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने मधेपुरा का इतिहास बताते हुये कहा कि ब्रिटिश सरकार ने मधेपुरा को वर्ष 1845 में जब अनुमंडल बनाया गया था, तब सुपौल व सहरसा का विस्तृत क्षेत्र ढाई दशकों तक मधेपुरा अनुमंडल द्वारा ही प्रशासित होता रहा. जिसके 25 वर्ष बाद मधेपुरा से अलग कर सुपौल को वर्ष 1870 में अनुमंडल बनाया गया. उन्होंने बताया कि मधेपुरा के जिला बनने के 10 वर्ष बाद सुपौल को 1991 में जिला बनाया गया. वहीं सहरसा वर्ष 1954 में अनुमंडल के साथ-साथ पूर्ण जिला घोषित हुआ. आज की तारीख में सहरसा एवं सुपौल दोनों को अपना-अपना केंद्रीय विद्यालय भी है और अपना-अपना गजेटियर भी है. डा भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि मधेपुरा को विश्व स्तरीय रेल इंजन कारखाना, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज होने के बावजूद मधेपुरा को ना तो अपना केंद्रीय विद्यालय है और ना अपना गजेटियर है. उन्होंने कहा कि पूर्व में भी उन्होंने जिले में केंद्रीय विद्यालय खोलने एवं अपना गजेटियर होने की मांग जनप्रतिनिधियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों से करते रहे हैं.

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Author: Kumar Ashish

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