मिठाई रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, यात्रियों को होती है परेशानी

मिठाई रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं की कमी, यात्रियों को होती है परेशानी

फोटो-मधेपुरा-10- जर्जर भवन, 11 जर्जर शौचालय

मिठाई रेलवे स्टेशन पर सुविधा बढ़ाने के लिए सांसद को लिखा पत्र

प्रतिनिधि,

मधेपुरा

मिठाई रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं की कमी है. रेलवे स्टेशन का भवन पुराना हो गया है. आधुनिकता के नाम पर स्टेशन पर कोई नया निर्माण नहीं हुआ है. क्षेत्र की आबादी के साथ ही ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर आज भी सिर्फ लोकल गाड़ियों का ही ठहराव है. मिठाई रेलवे स्टेशन दशकों से भवन जर्जर अवस्था में है. कभी भी बड़ी घटना घट सकती है. प्लेटफाॅर्म की ऊंचाई व लंबाई कम है. इससे आये दिन दुर्घटना होती रहती है. प्रतिदिन हजारों यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन यात्री शेड नहीं रहने के कारण यात्रियों को धूप व बरसात में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. यहां बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. स्टेशन के बगल में रेल अंडर पास 94 ए निर्माण में कराया गया है. इसमें अनियमितता हुई है, इसके कारण बरसात के बाद अंडरपास में दो से तीन फीट पानी भर जाती है. इससे आवागमन में दिक्कत होता है, जिससे दूसरी तरफ बाढ़ आश्रय स्थल, पंचायत सरकार भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र वही ग्रामीणों को वाहन लेकर आने-जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

सांसद को जनप्रतिनिधियों ने सौंपा मांग पत्र

मिठाई रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय सांसद दिनेश चंद्र यादव को एक मांग पत्र लिखा है. इसमें मिठाई रेलवे स्टेशन के वर्तमान में वास्तविक स्थिति को दर्शाया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिठाई फ्लैग स्टेशन को स्टेशन का पूर्ण दर्ज देने के साथ-साथ जर्जर भवन का आधुनिकीकरण व कंप्यूटरिकृत टिकट प्रणाली, प्लेटफाॅर्म की लंबाई व ऊंचाई के साथ-साथ अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग की है. मांग पत्र मिठाई पंचायत के मुखिया नवीन कुमार, सरपंच बलराम यादव, समिति रंजू देवी व समिति प्रतिनिधि व समाजसेवी अशोक कुमार आदि ने सौंपा है.

प्लेटफाॅर्म नीचे होने से हादसों का डर

यात्री सदर प्रखंड के बेरबा निवासी शशि कुमार का कहना है कि रेलवे प्लेटफाॅर्म नीचा होने से हर समय हादसे होने का भय बना रहता है. कई बार लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं. जल्दबाजी में यात्री ट्रेन में चढ़ने लगते हैं, तो पैर फिसल कर चोटिल हो जाते हैं. यदि प्लेटफार्म की ऊंचाई सही हो तो यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने व उतरने में कोई परेशानी नहीं होगी.

यात्री सुमित कुमार का कहना है कि अंग्रेज के समय में बना रेलवे स्टेशन प्रचलित था, लेकिन जब से बड़ी लाइन का शुरुआत यहां किया गया है तब से यह रेलवे स्टेशन हाल्ट में बदल गया और खंडार जैसी स्थिति पैदा हो गयी. यहां न तो यात्रियों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था है न तो खड़े होने के लिए कोई व्यवस्था है. शुद्ध पानी के लिए चापाकल भी नहीं है, जबकि चापाकल के लिए चार पाइप लगी है. यात्री रूपेश कुमार का कहना है कि 2008 से पूर्व जब छोटी लाइन का परिचालन होता था, तो यहां से लंबी दूरियों के लिए भी गाड़ी रूकती थी, लेकिन जब से बड़ी लाइन की शुरुआत की गयी तो नाही यहां कोई एक्सप्रेस रूकती है न ही लंबी दूरी की टिकट उपलब्ध हो पाती है और लोकल गाड़ी का आवागमन की सूचना भी नहीं मिल पाती है. गाड़ी की सूचना न होने के कारण कभी-कभी घंटे पर इंतजार करना पड़ता है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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