INSPIRE Award Udakishunganj: मधेपुरा में प्रखंड के सभी 85 विद्यालयों ने इंस्पायर अवार्ड योजना का निर्धारित लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा कर लिया है. मध्य विद्यालय से लेकर उच्च विद्यालय तक के स्कूलों की इस उपलब्धि को शिक्षा विभाग ने उल्लेखनीय माना है.
इस सफलता का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इंस्पायर अवार्ड योजना विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें अपने आसपास की समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक आधारित नए आइडिया और प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करती है.
85 में 85 विद्यालयों ने पूरा किया लक्ष्य
उदाकिशुनगंज प्रखंड में संचालित मध्य विद्यालय, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, उत्क्रमित उच्च विद्यालय और उच्च विद्यालयों को मिलाकर कुल 85 विद्यालय हैं. इन सभी विद्यालयों ने इंस्पायर अवार्ड के लिए निर्धारित लक्ष्य पूरा किया है.
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सागर कुमार चौधरी ने बताया कि सभी 85 विद्यालयों ने योजना का लक्ष्य शत प्रतिशत पूरा किया है. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, विज्ञान शिक्षकों और प्रखंड स्तरीय टेक्निकल टीम के प्रयास की सराहना की.
उन्होंने कहा कि सभी ने आपसी समन्वय और जिम्मेदारी के साथ काम किया, जिसका परिणाम शत प्रतिशत उपलब्धि के रूप में सामने आया है.
अब छात्रों के आइडिया को मिल सकता है ₹10 हजार का सहारा
इंस्पायर अवार्ड योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक आधारित नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
चयनित विद्यार्थियों को उनके प्रोजेक्ट के आधार पर सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. यह राशि संबंधित विद्यार्थी के बैंक खाते में उपलब्ध करायी जाती है.
इससे विद्यार्थियों को अपने आइडिया को प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने में आर्थिक मदद मिलती है. ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए ऐसी योजनाएं खास महत्व रखती हैं, क्योंकि कई बार अच्छे आइडिया संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते.
स्कूलों के लिए भी बड़ी उपलब्धि क्यों?
उदाकिशुनगंज के सभी 85 विद्यालयों का लक्ष्य पूरा करना केवल विभागीय आंकड़ा नहीं है. इसका सीधा संबंध स्कूलों में विज्ञान आधारित गतिविधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी से भी है.
इंस्पायर अवार्ड जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को यह सोचने का अवसर मिलता है कि उनके गांव, घर, स्कूल या आसपास की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान तकनीक के माध्यम से कैसे किया जा सकता है.
इससे विद्यार्थियों में सवाल पूछने, प्रयोग करने और अपने विचार को मॉडल या प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है.
प्रधानाध्यापक और विज्ञान शिक्षकों की रही अहम भूमिका
प्रखंड टेक्निकल टीम के सदस्य शैलेश कुमार चौरसिया ने बताया कि उदाकिशुनगंज प्रखंड शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं को शत प्रतिशत पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करता है.
उन्होंने कहा कि इंस्पायर अवार्ड के लक्ष्य को पूरा करने में विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और विज्ञान शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही. प्रखंड टेक्निकल टीम ने भी विद्यालयों के साथ समन्वय बनाकर लक्ष्य पूरा कराने में सहयोग किया.
टेक्निकल टीम के प्रयास को मिली सराहना
इस उपलब्धि पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने सभी संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, विज्ञान शिक्षकों और प्रखंड स्तरीय टेक्निकल टीम को बधाई दी है.
प्रखंड टेक्निकल टीम में शैलेश कुमार चौरसिया, वंदना कुमारी, मंजर आलम, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार चौरसिया, संजय प्रताप, रितु, बसंत झा, सियाराम मोची, कुमोद दास, महालीकात झा, संजीव सिंह, स्मृति, पुरुषोत्तम कुमार, अविनाश कुमार, कंचन माला, कुमार किशोर केसरी, ललन और अरुण सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भूमिका निभायी.
INSPIRE Award Udakishunganj: अब चुनौती अच्छे आइडिया को प्रोजेक्ट में बदलने की
85 विद्यालयों का लक्ष्य पूरा होने के बाद अगली चुनौती विद्यार्थियों के आइडिया को बेहतर प्रोजेक्ट में बदलने की होगी. योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब छात्रों के स्थानीय समस्याओं से जुड़े नए और उपयोगी मॉडल सामने आएं.
उदाकिशुनगंज में लक्ष्य पूरा होने से अब स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का रास्ता और मजबूत हुआ है. शिक्षा विभाग और विद्यालयों के सामने अब इन बच्चों के नवाचार को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने की जिम्मेदारी होगी.
