मधेपुरा में नो-एंट्री का अजब नियम! एक ही रास्ते पर कहीं 8 तो कहीं 11 बजे से रोक

शहर में भारी वाहनों के प्रवेश के लिए लगे नो-एंट्री के बोर्डों पर अलग-अलग समय दर्ज होने से वाहन चालकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. कहीं सुबह 8 बजे से तो कहीं 11 बजे से रोक, इस विसंगति से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है. स्थानीय लोगों और चालकों ने प्रशासन से स्पष्टता की मांग की है.

मधेपुरा : शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग जगहों पर लगाए गए नो-एंट्री बोर्ड ही वाहन चालकों के लिए असमंजस का कारण बन रहे हैं. एक ही क्षेत्र के प्रवेश बिंदुओं पर लगे बोर्डों पर नो-एंट्री का समय अलग-अलग दर्ज है. कहीं सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक बतायी गयी है, तो कहीं यह समय सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक लिखा है. यानी दोनों बोर्डों के बीच नो-एंट्री शुरू होने के समय में तीन घंटे का अंतर है.

सहरसा-मधेपुरा रोड पर पुल के पास बैरिकेडिंग नहीं होने की वजह से दुर्घटनाओं की शिकायत भी सामने आती रही है. वहीं शहर के एक प्रवेश मार्ग पर जिला प्रशासन, मधेपुरा के नाम से लगाए गए बोर्ड पर स्पष्ट रूप से सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक की जानकारी दी गयी है.

इसके विपरीत, इसी क्षेत्र के दूसरे प्रवेश बिंदु पर मधेपुरा पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग बोर्ड पर सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश निषेध की जानकारी दर्ज है.

एक ही रास्ता लेकिन अलग अलग समय से परेशान लोग | Prabhat Khabar Network

रास्ता एक, नो-एंट्री का समय अलग-अलग

एक ही क्षेत्र में अलग-अलग समय दर्ज होने से बाहर से आने वाले भारी वाहन चालकों के सामने यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर लागू नियम क्या है. यदि अलग-अलग मार्गों के लिए अलग समय निर्धारित किया गया है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी बोर्ड पर मार्ग और दिशा के साथ दी जानी चाहिए.

नो-एंट्री व्यवस्था का उद्देश्य शहर के व्यस्त मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखना है. लेकिन इसके लिए नियम और समय की स्पष्ट जानकारी भी जरूरी है.

तीन घंटे का अंतर, बढ़ा असमंजस

एक बोर्ड सुबह 8 बजे से भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक की जानकारी देता है, जबकि दूसरे पर नो-एंट्री का समय सुबह 11 बजे से बताया गया है. ऐसे में कोई वाहन चालक पहले बोर्ड को देखकर अपना रास्ता बदलता है और दूसरे प्रवेश बिंदु पर पहुंचता है, तो उसे अलग समय की जानकारी मिलती है.

इससे यह सवाल उठता है कि क्या अलग-अलग मार्गों के लिए अलग समय निर्धारित किया गया है या बोर्डों पर अलग-अलग समय दर्ज होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

बोर्डों की समीक्षा और समन्वय की जरूरत

स्थानीय लोगों का कहना है कि यातायात व्यवस्था के लिए नो-एंट्री जरूरी हो सकती है, लेकिन नियम स्पष्ट होने चाहिए. शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर लगे सभी बोर्डों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन पर सही और अद्यतन समय दर्ज हो.

यदि प्रशासन ने अलग-अलग मार्गों के लिए अलग समय निर्धारित किया है, तो बोर्ड पर संबंधित मार्ग और समय को स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए. वहीं, यदि पूरे क्षेत्र में एक ही नियम लागू है, तो सभी प्रवेश बिंदुओं पर एक समान समय वाले बोर्ड लगाए जाएं.

जिला प्रशासन और पुलिस के बोर्डों पर अलग-अलग समय दर्ज होने के कारण संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी जरूरी है, ताकि वाहन चालकों के साथ नो-एंट्री व्यवस्था लागू कराने वाले कर्मियों के लिए भी नियम स्पष्ट रहे.

वाहन चालकों ने मांगी स्पष्ट जानकारी

भारी वाहन चालकों के लिए नो-एंट्री का समय जानना जरूरी होता है. निर्धारित समय में शहर में प्रवेश नहीं मिलने पर उन्हें वैकल्पिक मार्ग तलाशना पड़ता है. ऐसे में सही और स्पष्ट जानकारी मिलने से वे पहले से अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं.

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर लगे नो-एंट्री बोर्डों की जांच कराने की मांग की है. साथ ही, यदि अलग-अलग मार्गों के लिए अलग समय निर्धारित है तो उसका कारण और मार्गवार जानकारी स्पष्ट करने, जबकि एक ही नियम लागू होने पर सभी जगह समान समय वाला बोर्ड लगाने की मांग की है.

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By Aman Kumar

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