Madhepura, दर्शनशास्त्र विषय में पद-सृजन की मांग

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार के सभी नवसृजित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई शुरू करने हेतु पद-सृजन करने का अनुरोध किया

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार के सभी नवसृजित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई शुरू करने हेतु पद-सृजन करने का अनुरोध किया

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट,

बीएनएमयू, मधेपुरा के सीनेटर एवं अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सहसचिव डॉ. सुधांशु शेखर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार के सभी नवसृजित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई शुरू करने हेतु पद-सृजन करने का अनुरोध किया है. डॉ. शेखर ने कहा है कि बिहार सरकार द्वारा राज्य की उच्च शिक्षा को सुदृढ़ एवं व्यापक बनाने के उद्देश्य से सभी प्रखंडों में स्नातक स्तरीय (डिग्री) महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय युगांतरकारी है. इससे विकसित बिहार के सपनों को साकार करने में मदद मिलेगी लेकिन इन नवसृजित महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई नहीं होना इस लक्ष्य की दिशा में एक रोड़े की तरह है. उन्होंने कहा है कि बिहार प्राचीन काल से ही दार्शनिकों, चिंतकों एवं साधकों की पुण्यभूमि है। यहां से गौतम बुद्ध, महावीर, राजा जनक, याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रेयी, भारती, मंडन मिश्र, गुरु गोविंद सिंह, महात्मा गाँधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा जयप्रकाश नारायण के विचार देश-दुनिया में फैला.

बिहार की इस दार्शनिक- वैचारिक विरासत के आधार पर ही नए बिहार का निर्माण किया जा सकता है. इसके लिए कि नवसृजित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र के पठन-पाठन की व्यवस्था करना आवश्यक है.

उन्होंने कहा है कि नवसृजित महाविद्यालयों में दर्शनशास्त्र विषय के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था होने से बिहार की युवा पीढ़ी अपने समृद्ध ज्ञान परंपरा को जान-समझ सकेगी. इससे उनमें मानवीय मूल्यों, नैतिक संस्कारों एवं सामाजिक सरोकारों का भी विकास होगा। इसके साथ ही यह तार्किक क्षमताओं के विकास की दृष्टि से भी उपयोगी होगा.

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Author: MANISH KUMAR

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