त्योहारों और शॉपिंग सीजन की शुरुआत होते ही साइबर अपराधियों ने आम लोगों को ठगने का नया और शातिर तरीका अपना लिया है. इन दिनों सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और एसएमएस (SMS) के जरिए भारी छूट, आकर्षक कैशबैक और बंपर लकी ड्रॉ का लालच देकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. मधेपुरा पुलिस और साइबर सेल ने आम जनता को सतर्क करते हुए किसी भी अनजान नंबर से आए लुभावने लिंक्स से दूर रहने की अपील की है.
कैसे शिकार बना रहे हैं साइबर ठग?
पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी के इस खेल में फर्जी तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है:
- क्लोन वेबसाइट बनाना: ठग नामी-गिरामी और भरोसेमंद ई-कॉमर्स कंपनियों से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट और लिंक्स तैयार करते हैं.
- डाटा और फोन हैकिंग: सस्ते सामान के लालच में जैसे ही कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है, उससे बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन (UPI PIN) या व्यक्तिगत डाटा हासिल कर लिया जाता है.
- खाता खाली: कई मामलों में लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित का फोन हैक हो जाता है और खाते से जमा पूंजी गायब हो जाती है.
साइबर सेल और पुलिस की अहम सलाह (सुरक्षा टिप्स)
मधेपुरा पुलिस विभाग और जिला प्रशासन ने नागरिकों को साइबर अपराध से सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित गाइडलाइंस जारी की हैं:
- अज्ञात लिंक्स से बचें: अनजान नंबरों से आए बंपर डिस्काउंट या फ्री गिफ्ट के लिंक्स पर भूलकर भी क्लिक न करें.
- आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल: केवल आधिकारिक और verified वेबसाइट्स या मोबाइल ऐप से ही ऑनलाइन खरीदारी करें.
- गोपनीयता बनाए रखें: अपना बैंक खाता विवरण, यूपीआई पिन, ओटीपी (OTP) या डेबिट/क्रेडिट कार्ड का CVV किसी से साझा न करें.
- सत्यापन जरूरी: असाधारण रूप से भारी छूट देने वाले विज्ञापनों और ऑफर्स की पहले आधिकारिक स्रोत से पड़ताल अवश्य करें.
पुलिस की अपील: "आपकी थोड़ी सी सजगता साइबर ठगी से बचा सकती है. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं."
