राजकीय नलकूप बेकार, रबी की सिंचाई को लेकर बढ़ी चिंता

राजकीय नलकूप बेकार, रबी की सिंचाई को लेकर बढ़ी चिंता

कुमारखंड . प्रखंड क्षेत्र में लहलहा रहे रबी की फसल को सिंचाई की जरूरत है, लेकिन सिंचाई के संसाधनों का अभाव है. नहर की शाखाओं में पानी नहीं है. ग्रामीण अंचल में सिंचाई के मुख्य संसाधनों सरकारी नलकूप हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता व विभागीय लापरवाही के चलते प्रखंड के राजकीय नलकूपों की हालत बदहाल है. प्रखंड के दर्जनभर सरकारी नलकूपों में से सभी खराब पड़े हैं. अमूमन के मशीन खराब है, तो नाले टूट टूट का अमन सतीत्व खो चुके हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं करायी जा रही है. नलकूप खराब होने से किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई को लेकर चिंचित हैं. ज्ञात हो कि सरकार द्वारा एक नलकूप से करीब तीन किमी की परिधि के खेतों की सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया है,लेकिन विभागीय लापरवाही व प्रशासनिक उदासीनता के कारण नलकूप रूम के बगल के किसानों को भी अपने खेतों में पटवन के लिए निजी बोरिंग का ही सहारा लेना पड़ रहा है. किसानों को मजबूरन निजी संसाधनों से सिंचाई करना पड़ रहा है. विभागीय लापरवाही व उदासीनता का आलम यह है कि कई नलकूप की केबल व ऑपरेटिंग रूम की दरवाजे व खिड़कियां टूट चुके हैं. अधिकांश नलकूपों के नाले टूटकर बिखर चुके हैं. कुछ लोगों ने नालों को अपने खेतों में मिला लिया हैं. प्रखंड के रौता गांव के किसान निर्मल यादव का कहना है कि प्रखंड के किसानों के सिंचाई के लिए 70 के दशक में लघु सिंचाई विभाग द्वारा सात नलकूपों को लगाया गया था. उसके बाद अन्य सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत कुल 13 नलकूपों की स्थापना की गयी. इन नलकूपों की स्थापन से प्रखंड के किसानों को कुछ वर्षों तक सिंचाई का लाभ मिला. कई तरह की समस्याओं के कारण अधिकांश नलकूप बंद होते गय. अभी हालात यह है कि रौता, बेल्ही, रामगंज, रघुनिया, बिशनपुर, रामनगर, घोड़दौल, परमानंदपुर, रहटा, लक्षमिनियां सहित अधिकतर सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं. इस कुव्यवस्था से किसानों में फसलों की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही हैं. किसान मो गयास उद्दीन, निर्मल झा, खुर्शीद आलम, मो नेजामउद्दीन, अनमोल यादव, अशोक कुशवाहा, महेश सिंह, उदय सिंह, सुदर्शन यादव, नागेंद्र सिंह आदि ने प्रशासन से नलकूपों को चालू कराने की मांग की है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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