BP Mandal Jayanti: मधेपुरा में बीपी मंडल की जयंती पर मंगलवार को उनके पैतृक गांव मुरहो में आयोजित राजकीय समारोह अचानक विरोध और नारेबाजी के कारण चर्चा में आ गया. मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव जैसे ही मंच पर संबोधन के लिए पहुंचे, बीपी मंडल के वंशजों और उनके समर्थकों ने उनके खिलाफ ‘वापस जाओ’ के नारे लगाने शुरू कर दिए.
मंच के पास अचानक शुरू हुई नारेबाजी से समारोह स्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया. विरोध कर रहे लोगों ने विद्यालयों के नाम बदले जाने को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाया. स्थिति बिगड़ती देख डीएम, एसपी और मौके पर मौजूद अन्य अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया. इसके बाद प्रदर्शनकारियों को समझाकर स्थिति शांत करायी गयी और विधानसभा उपाध्यक्ष ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपना संबोधन दिया.
मंच के पास पहुंचे बीपी मंडल के वंशज, शुरू हुई नारेबाजी
मुरहो में बीपी मंडल की जयंती पर राजकीय समारोह आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे.
कार्यक्रम निर्धारित तरीके से चल रहा था. इसी दौरान जब विधानसभा उपाध्यक्ष को संबोधन के लिए मंच पर बुलाया गया, तब रास बिहारी मंडल के पौत्र आनंद मंडल अपने समर्थकों के साथ मंच के समीप पहुंच गए.
इसके बाद नरेंद्र नारायण यादव के विरोध में ‘वापस जाओ’ के नारे लगने लगे. अचानक हुए इस विरोध से समारोह स्थल पर मौजूद लोगों का ध्यान कार्यक्रम से हटकर प्रदर्शन की ओर चला गया.
विद्यालयों के नाम बदलने को लेकर क्यों हुआ विरोध?
प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध विद्यालयों के नाम बदले जाने को लेकर था. उनका कहना था कि सरकार की नीति के तहत बिहार में 551 विद्यालयों के नाम बदले गए हैं.
इसी मुद्दे को लेकर मधेपुरा में बाबू रास बिहारी मंडल के नाम पर स्थापित रास बिहारी उच्च विद्यालय का नाम बदलकर ‘सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल’ किए जाने पर भी आपत्ति जतायी गयी.
प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित शिक्षण संस्थानों के नाम बदलना केवल नाम बदलने का मामला नहीं है. इससे उन महापुरुषों की सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी पहचान प्रभावित होती है.
‘ऐतिहासिक विरासत से नहीं होना चाहिए खिलवाड़’
विरोध कर रहे लोगों ने विद्यालयों के नाम परिवर्तन की नीति को लेकर अपनी नाराजगी जतायी. उनका कहना था कि बाबू रास बिहारी मंडल जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित संस्थान स्थानीय इतिहास और सामाजिक स्मृति का हिस्सा हैं.
उनके नाम हटाकर दूसरे नाम दिए जाने से आने वाली पीढ़ियों के सामने इन व्यक्तित्वों के योगदान और विरासत से जुड़ी पहचान कमजोर हो सकती है.
इसी मुद्दे को लेकर बीपी मंडल की जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की.
डीएम-एसपी ने संभाली स्थिति, फिर शुरू हुआ संबोधन
विरोध और नारेबाजी तेज होने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया.
डीएम और एसपी समेत अन्य अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया. इसके बाद विधानसभा उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव मंच पर पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के तहत अपना संबोधन दिया.
इस दौरान प्रशासन की कोशिश रही कि विरोध के कारण राजकीय समारोह की व्यवस्था प्रभावित न हो और कार्यक्रम को आगे जारी रखा जा सके.
BP Mandal Jayanti: जयंती समारोह में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना चर्चा का केंद्र
बीपी मंडल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. आयोजन का उद्देश्य बीपी मंडल के जीवन, सामाजिक न्याय और उनके योगदान को याद करना था.
लेकिन विद्यालयों के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर हुए विरोध ने समारोह को एक अलग वजह से चर्चा में ला दिया.
बीपी मंडल के पैतृक गांव में उनकी जयंती के अवसर पर उनके परिवार से जुड़े लोगों की ओर से किया गया यह विरोध स्थानीय स्तर पर विद्यालयों के नाम और ऐतिहासिक पहचान को लेकर चल रही बहस को भी सामने ले आया.
फिलहाल समारोह के दौरान स्थिति शांत करा दी गयी और कार्यक्रम निर्धारित रूप से पूरा हुआ. हालांकि, विद्यालयों के नाम परिवर्तन को लेकर उठी आपत्ति और रास बिहारी मंडल के नाम से जुड़े विद्यालय का नाम बदले जाने का मुद्दा आगे भी चर्चा में रहने की संभावना है.
