मधेपुरा. जगतगुरु परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज द्वारा रचित श्रीदुर्गाचरितमानस नामक आध्यात्मिक ग्रंथ को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के प्रभारी अनिल कुमार को भेंट किया. पुस्तकालय के प्रभारी ने ग्रंथ को स्वीकार करते हुए इसे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए उपयोगी बताया. मौके पर उत्सव समिति सहरसा के सदस्य ज्योति कुमार सिंह व सौरभ कुमार उर्फ पिंटू तिवारी उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि स्वामी आगमानंद जी महाराज द्वारा रचित व संपादित अनेक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक ग्रंथ समाज को ज्ञान और संस्कार प्रदान कर रहे हैं. इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति से शिष्टाचार भेंट कर 28 व 29 जुलाई को एमएलटी कॉलेज सहरसा के खेल मैदान में जगतगुरु परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव में मुख्य अतिथि व उद्घाटनकर्ता के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया. कुलपति ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में सहभागिता की सहमति प्रदान की. ज्योति ने बताया कि स्वामी आगमानंद जी महाराज द्वारा अब तक 19 पुस्तकों का लेखन, संपादन व प्रकाशन किया जा चुका है, जबकि लगभग इतनी ही पुस्तकें प्रकाशन की प्रतीक्षा में हैं. उन्होंने कहा कि स्वामी जी का साहित्य आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति व मानव मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
बीएनएमयू केंद्रीय पुस्तकालय को भेंट की गयी श्रीदुर्गाचरितमानस

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बीएनएमयू केंद्रीय पुस्तकालय को भेंट की गयी श्रीदुर्गाचरितमानस