कलियुग में कथा ही एक ऐसा साधन है, जिससे जीवन के सभी पापों का होता है नाश

त्याग, मर्यादा एवं सनातन धर्म के जीवंत प्रतीक हैं.

आलमनगर

प्रखंड के नंदकिशोर माधवानंद उच्च विद्यालय मैदान में हिंदु नववर्ष के शुभ अवसर पर आयोजित रामनवमी महोत्सव के दौरान रामकथा के दौरान चित्रकूट धाम से पधारे आचार्य कृपा शंकर जी महाराज ने कहा कि श्री राम कथा के श्रवण मात्र से अनेक जन्मों के पुण्य उदय होते हैं. कलियुग में कथा ही एक ऐसा साधन है, इससे व्यक्ति सरलता से अपने जीवन के सभी पापों को नष्ट कर पुण्य का भागी बनता है एवं स्वर्ग प्राप्त करने का अधिकार भी मिलता है. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला कथा के दौरान बालकांड का भावपूर्ण वर्णन करते हुये उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा एवं सनातन धर्म के जीवंत प्रतीक हैं. उनके जीवन का प्रत्येक क्षण समाज को सही मार्ग दिखाने वाला है. वहीं कथा के दौरान आचार्य कृपा शंकर जी महाराज ने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने माता क्याधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था. प्रह्लाद असुर राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र थे, जो भगवान विष्णु के कट्टर विरोधी थे. हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई बार मारने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु ने हर बार उनकी रक्षा की. वही उन्होंने आगे बताया कि अंततः भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप के वरदान का पालन करते हुये उसका वध किया एवं भक्त प्रह्लाद को बचाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान हमेशा भक्तों के वश में रहते हैं एवं सच्ची भक्ति करने पर संकट के समय नंगे पांव दौड़े चले आते हैं. कथा व्यास ने सत्संग के महत्व पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि सत्संग से शांति मिलती है एवं यह जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुये कहा कि गुरु भगवान से मिलने का मार्ग बताते हैं. कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर आधारित सजीव झांकियां प्रस्तुत की गईं. मधुर भजनों एवं चौपाइयों की प्रस्तुति भी हुई.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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