मधेपुरा में अवैध पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर का जाल, मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

मधेपुरा में अवैध पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटर का जाल,

जिला मुख्यालय समेत सभी प्रखंडों में सिर्फ 18 लैब पंजीकृत, फिर किसके भरोसे चल रहे सैकड़ों जांचघर और कलेक्शन सेंटर?

मधेपुरा.

जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. शहर से लेकर गांव और सभी प्रखंडों तक अवैध पैथोलॉजी लैब एवं कलेक्शन सेंटरों का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है. हालत यह है कि हर बाजार, चौक-चौराहे और निजी क्लीनिकों के आसपास जांचघर खुले नजर आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पूरे जिले में मात्र 18 पैथोलॉजी लैब ही पंजीकृत हैं.

सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार के अनुसार जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों को मिलाकर सिर्फ 18 जांचघर ही विधिवत रजिस्टर्ड हैं. जो अवैध रूप से जांच घर संचालित है अभियान चलाकर कार्रवाई की जायेगी. जबकि जमीनी हकीकत यह है कि जिलेभर में सैकड़ों की संख्या में पैथोलॉजी लैब और बड़े-बड़े संस्थानों के नाम पर कलेक्शन सेंटर संचालित हो रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बाकी लैब और सेंटर किस नियम, लाइसेंस और अनुमति के तहत मरीजों की जांच कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार जिले के कई जांचघरों में बिना प्रशिक्षित तकनीशियन और गैर-योग्य कर्मियों द्वारा खून जांच, शुगर टेस्ट, यूरिन जांच समेत कई महत्वपूर्ण टेस्ट किए जा रहे हैं. कई लैब में योग्य पैथोलॉजिस्ट की मौजूदगी तक नहीं है. इसके बावजूद मरीजों से भारी शुल्क वसूला जा रहा है. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां लोग जानकारी के अभाव में किसी भी जांचघर पर भरोसा कर जांच कराने को मजबूर हैं. इतना ही नहीं, कई बड़े पैथोलॉजी संस्थानों के नाम पर जिलेभर में कलेक्शन सेंटर भी तेजी से खुल रहे है. इन सेंटरों पर मरीजों का ब्लड और अन्य सैंपल लेकर बाहर की लैब में भेजा जाता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या इन सेंटरों के पास आवश्यक अनुमति है? क्या वहां सैंपल लेने वाले कर्मी प्रशिक्षित हैं? क्या सैंपल को सुरक्षित रखने और ले जाने के मानकों का पालन किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास स्पष्ट नहीं है.

स्वास्थ्य जानकारों की मानें तो पैथोलॉजी रिपोर्ट किसी भी मरीज के इलाज का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है. डॉक्टर दवा और इलाज का निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लेते है. ऐसे में यदि रिपोर्ट गलत हुई तो मरीज का गलत इलाज शुरू हो सकता है, जिससे उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि गलत रिपोर्ट कई बार मरीज की जान तक पर भारी पड़ सकती है.

जिले में संचालित कई लैब और कलेक्शन सेंटरों में बायो मेडिकल वेस्ट नियमों की भी अनदेखी की जा रही है. इस्तेमाल किये गये सिरिंज, ब्लड सैंपल और मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था नहीं होने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. कई जगहों पर मेडिकल वेस्ट खुले में फेंके जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता और कमजोर निगरानी के कारण अवैध लैब संचालकों का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है. कई जांचघर वर्षों से खुलेआम संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर इन अवैध जांचघरों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो बिना डर के कारोबार चला रहे हैं.

सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिले में संचालित सभी पैथोलॉजी लैब और कलेक्शन सेंटरों की जांच कर अवैध रूप से चल रहे संस्थानों को तत्काल बंद कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है और इसमें समझौता नहीं किया जा सकता.

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध जांचघरों और कलेक्शन सेंटरों की सूची तैयार करने तथा जांच अभियान चलाने की बात कही जा रही है, लेकिन अब जिले की जनता की नजर केवल आश्वासन पर नहीं, बल्कि कार्रवाई पर टिकी हुई है. लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले अवैध लैब और सेंटरों पर कब तक सख्त कार्रवाई होगी.

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Author: Kumar Ashish

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