भूमाफिया ने पूर्व सीएम की जमीन बेची

गड़बड़झाला . जाली आइकार्ड बना 200 डिसमल जमीन का निबंधन पूर्व मुख्यमंत्री बीपी मंडल की पुत्री के नाम से है जमीन का खतियान, पूरा परिवार रहता है अमेरिका में गांव के ही अखिलेश यादव के वोटर आइकार्ड को कंप्यूटर द्वारा जालशाजी कर दूसरे आइकार्ड बना बीपी मंडल का नाती बन किया जमीन का निबंधन मधेपुरा […]

गड़बड़झाला . जाली आइकार्ड बना 200 डिसमल जमीन का निबंधन

पूर्व मुख्यमंत्री बीपी मंडल की पुत्री के नाम से है जमीन का खतियान, पूरा परिवार रहता है अमेरिका में
गांव के ही अखिलेश यादव के वोटर आइकार्ड को कंप्यूटर द्वारा जालशाजी कर दूसरे आइकार्ड बना बीपी मंडल का नाती बन किया जमीन का निबंधन
मधेपुरा : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मंडल आयोग के प्रणेता बीपी मंडल के नाती का फर्जी वोटर आइकार्ड बना कर लाखों की जमीन का निबंधन कराने का मामला प्रकाश में आया है. इस बाबत नाढ़ी के अखिलेश यादव ने मधेपुरा थानाध्यक्ष को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके वोटर आइकार्ड का गलत उपयोग कर 200 डिसमल जमीन का निबंधन 31 जनवरी 2017 को कराया गया है. इस बाबत अखिलेश यादव द्वारा अपना वोटर आइकार्ड दिया गया.
इसमें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी वोटर आइकार्ड नंबर एआर 10297747 नाम अखलेश यादव पिता का नाम नारायण यादव, पता 48 नाढ़ी गांव बेलो, अंचल मुरलीगंज, जिला मधेपुरा अंकित है. वहीं जमीन निबंधन के लिए आवश्यक पहचान पत्र के तौर पर दिये गये वोटर आइडी का भी यही नंबर है.
पर उसमें नाम मनीष कुमार यादव, पिता का नाम निर्मल कुमार सिंह, गांव मुरहो, अंचल मधेपुरा दर्ज है. जालसाज द्वारा बड़ी सफाई से जाली आइकार्ड बनाया गया. पर एक बड़ी गलती रह गयी है पत दर्ज करने में पिन कोड लिखने के क्रम में जालसाज फॉन्ट बदलना भूल गया और हिंदी के अंक की जगह अंग्रेजी
के अंकों में पिन दर्ज है. इपिक कार्ड में हिंदी में लिखे पते में हिंदी अंक दर्ज होते हैं और अंग्रेजी में लिखे पते पर अंग्रेजी में अंक दर्ज रहता है.
बीपी मंडल के नाती हैं मनीष, रहते हैं अमेरिका में. जिस मनीष यादव के नाम फर्जी वोटर आईडी बनाकर जमीन निबंधन कराया गया है. वह वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं. जमीन का खतियान रेणु कुमारी के नाम से दर्ज है जो बीपी मंडल की पुत्री है. रेणु कुमारी अपने पति निर्मल कुमार सिंह तथा दो पुत्र मनीष यादव एवं विकास यादव के साथ अमेरिका में है. मनीष के आव्रजन रिकॉर्ड से भी यह स्पष्ट हो सकता है कि 31 जनवरी 2017 को वह भारत में नहीं था.
गिरोह है सक्रिय . जिले में जमीन के खतियान की जानकारी लेकर इस तरह के फर्जीवारा करने का गिरोह सक्रिय है. अक्सर ऐसे मामले सामने नहीं आ पाते जमीन मालिक जबतक कुछ समझ पाता है परेशानी बढ़ जाती है. लेकिन इस मामले में मंडल परिवार के यहां ही कार्य करने वाले अखलेश यादव की सक्रियता से मामले का तत्काल पता चल पाया है. अखलेश ने कहा कि इस मामले में जो गिरोह सक्रिय है उसके प्रमुख कर्ताधर्ता अनमोल यादव एवं भूपेंद्र यादव है. यह दोनों भाई 200 डिसमल जमीन को गलत तरीके से हड़पने की नियत से इस घटना को अंजाम दिया है.

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