टॉर्च व एंबुलेंस लाइट में हुआ ऑपरेशन

कुव्यवस्था. पीएचसी में हो सकती है बड़ी घटना िसंहेश्वर पीएचसी में कुव्यवस्था का आलम यह है कि शुक्रवार की रात एंबुलेंस लाइट व टॉर्च के सहारे परिवार नियोजन का ऑपरेशन किया गया. सबों के जुबान पर बस इतनी सी बात थी कि कैसे भी मरीज का ऑपरेशन सही से हो जाये. सिंहेश्वर : सरकार के […]

कुव्यवस्था. पीएचसी में हो सकती है बड़ी घटना

िसंहेश्वर पीएचसी में कुव्यवस्था का आलम यह है कि शुक्रवार की रात एंबुलेंस लाइट व टॉर्च के सहारे परिवार नियोजन का ऑपरेशन किया गया. सबों के जुबान पर बस इतनी सी बात थी कि कैसे भी मरीज का ऑपरेशन सही से हो जाये.
सिंहेश्वर : सरकार के तमाम दावे के विपरित स्वास्थ्य विभाग में अपेक्षित सुधार अबतक नहीं हो पाया है. सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी को चकाचक व रोशन रखने की तमाम बातें की जाती है, लेकिन हाल उलट है. स्थिति यह है कि रात में कैंप लगाकर परिवार नियोजन के तहत ऑपरेशन के दौरान जब बिजली चली गयी, तो टॉर्च व एंबुलेंस की हेडलाइट जलाकर ऑपरेशन करना पड़ा. गांव से आये मरीजों के लिए यह एक सदमा था कि उनके परिजन ऑपरेशन थियेटर में हैं
और बिना बिजली के पर्याप्त रोशनी रखे उनका ऑपरेशन किया जा रहा है. हालांकि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने आउट सोर्सिंग की एजेंसी को इस संबंध में चेतावनी दी, लेकिन यह सवाल है कि ऑपरेशन का कैंप लग रहा हो और मशिनरी को दुरूस्त न रखा जाय तो किसकी जिम्मेवारी बनती है.
कर्मी ने कहा, जेनरेटर हुआ खराब
इस बाबत जब आउट सोर्सिंग के अंकु कुमार से बिजली जाने के बाद जेरनेटर नहीं चलने का कारण पूछा गया तो उसने बताया कि लाइट जाने के बाद जैसे ही जेनेटर को स्टार्ट किया गया. उसी वक्त जेनेटर तकनीकी खराबी आ गयी जिसे ठिक करने में 10 – 15 मिनट लग गया.
ऑपरेशन के बीच परिजन करते रहे दुआ
पीएचसी में शुक्रवार की रात को एंबुलेंस लाइट व टॉर्च के सहारे परिवार नियोजन का ऑपरेशन किया गया. हालांकि डाॅक्टर के सुझबुझ से सभी ऑपरेशन सही ढंग से किया जा सका. वहीं इस प्रकार के ऑपरेशन पद्धति को देख लोग व मरीज के परिजन आश्चर्य चकित हो गये. सबों के जुबान पर बस इतनी सी बात थी कि कैसे भी मरीज का ऑपरेशन सही से हो जाये. मरीज के परिजन ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुये बताया कि ऑपरेशन करने के दौरान ही लाइट चली गयी और 15 मिनट तक एंबुलेंस लाइट व टॉर्च के सहारे ही ऑपरेशन किया गया. इस बीच अप्रिय घटना घट सकती थी. वहीं दूसरी तरफ बताया गया कि सुनीता देवी इटहरी व शर्मिला देवी कमरगामा का ऑपरेशन एंबुलेंस लाइट व टॉर्च के सहारे किया गया.
लाइट जाने से पूर्व एक मरीज का ऑपरेशन प्रक्रिया लगभग समाप्त होने पर था, जबकि दूसरे को सुई दिया जा चुका था. जिस वजह से ऑपरेशन में देरी करना मरीज के लिए हितकारी नहीं होता. इस कारण से टॉर्च के सहारे ऑपरेशन प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा था. हालांकि आउट सोर्सिंग वाले को सख्त हिदायत दिया जा चुका है कि आगे से इस प्रकार की परेशानी न हो.
डॉ आनंद भगत, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

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