मामला मुरलीगंज थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 14 का
16 जनवरी को हुआ था अपहरण
26 को हुआ मामला दर्ज
पुलिस ने कहा-केस दर्ज कर सभी पहलुओं पर चल रही है जांच
मुरलीगंज : मुरलीगंज थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 14 निवासी विजय कुमार सिंह पिता बिमल प्रसाद सिंह ने दिनांक 26 जनवरी को मुरलीगंज में एक आवेदन देकर अपनी दो चांदनी सिंह उम्र 20 वर्ष और खुशी सिंह उम्र 14 वर्ष का अपहरण दिनांक 16 एक 2017 की सुबह पांच बजे कर लिया गया. थाना को दिये गये आवेदन में बिमल प्रसाद सिंह ने बताया कि उनकी दोनों पुत्री घर में सोई हुई थी. अहले सुबह मेरी पुत्री के घर का दरवाजा खुला था और वह दोनों गायब थी. सुबह में करीब पांच – छह बजे एक स्कारपियो उसके घर के आस-पास बार-बार आ-जा रही थी. इतना ही नहीं उस गाड़ी को उन्होंने अपने घर के पास लगा हुआ देखा.
उनके घर के ठीक दूसरी तरफ भूपेंद्र नारायण सिंह पिता चंद्रशेखर सिंह ने भी बताया कि 16 की सुबह कल चार बजे सड़क पर जब बाहर आये तो एक स्कार्पियो विजय सिंह के घर के सामने स्टार्ट खड़ी थी. मुझे देखते ही वह गाड़ी एसएच 91 पर बिहारीगंज की ओर चली गई. विजय सिंह ने बताया कि वह है स्कार्पियो गाड़ी कठोतिया गांव में बैजनाथ पाल के घर के सड़क पर खड़ी थी. लेकिन 10 मिनट बाद वह गाड़ी वहां से भी निकल गई. आगे इस घटना के विषय में विजय सिंह ने बताया कि उस दिन से पहले वे अपने स्तर पर पुत्री की बरामदगी हेतु पूरा कोशिश किया. जिससे समाज में उनकी बदनामी न हो. थक हारकर जब कहीं पता ना चला तो थाना को आवेदन दिया. थाने में कुछ व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण के मामले दर्ज करवाये गये हैं. दोनों पुत्रियों को खोजने के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं पर कहीं पता नहीं चल पा रहा है. इस मामले के अनुसंधानकर्ता मुरलीगंज थाना सहायक अवर निरीक्षक बाल्मिकी यादव ने बताया कि हर तथ्यों पर बारीकी से अनुसंधान कर रहे हैं. पिछले दिनों बिहार ईयर थाना में विजय सिंह के खिलाफ 19 जनवरी को एक मामला दर्ज करवाया गया है. घटनाक्रम की जांच जारी है.
बिहार की राजनीति को दी थी नयी ऊंचाई
बिहार के शिक्षा मंत्री व पथ निर्माण मंत्री रहे थे विद्याकर कवि
वर्ष 1957 से 1967 तक विधान परिषद सदस्य भी रहे
969 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बने
ब्रजेश
जीवन भर राजनीति को जनसेवा का आधार मानने वाले और राजनीति के विकृत चेहरे के मध्य भी अपने उज्जवल चरित्र को स्वच्छ और बेदाग रखने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी बिहार के पूर्व मंत्री विद्याकर कवि ने बिहार की राजनीति में ऊंचे आदर्श स्थापित किया. सन बयालीस में गांधी जी के राजनीति व सामाजिक संघर्ष गाथा का प्रारंभ करने वाले व्यक्तित्व का अंत 31 जनवरी 1986 को पूर्णिया में हिंदी राज्य भाषा की बैठक में हृदयगति रुक जाने से हो गयी थी. उनके अमूल्य योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी पुण्यतिथि पर 31 जनवरी का संपूर्ण राज्य में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं.
शिक्षक से बने राजनेता . शिक्षक से राजनेता की लंबी यात्रा में मर्यादित आचरण, उदारता, कुशल नेतृत्व, कथनी और करनी में तालमेल सहित अनेक गुणों का अभूतपूर्व मिश्रण के पात्र थे. अपने प्रारंभिक जीवन में समाजसेवी व साहित्य साधक के रूप में उन्होंने विशिष्ट पहचान बनायी. विद्याकर कवि का जन्म सन् 1923 में आलमनगर के एक संभ्रान्त परिवार में हुआ था. पिता मनमोहन कवि ब्रज भाषा के उत्कट विद्वान थे. पिता के संस्कार से परिपूर्ण साहित्य प्रेम और जनसेवा भाव स्व कवि में कूट-कूट कर भरा था. विद्याकर कवि का व्यक्तित्व त्याग, सत्य निष्ठा एवं सैद्घांतिक दृढ़ता का अनूठा मिश्रण था. उच्च पदों पर विराजमान होकर भी उनकी विनयता, विनम्रता एवं कर्त्तव्य परायणता कभी क्षति नहीं हुई.
कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर. विद्याकर कवि 1942 से छात्र जीवन से ही राजनीति एवं सामाजिक सेवा में सक्रिय थे. वे आलमनगर स्थित उच्च विद्यालय में अवैतनिक रहकर शिक्षक बनकर बच्चों में शिक्षा का अलख जगाया. 29 फरवरी 1953 को विद्यालय से अध्यापन कार्य त्याग कर राजनीति के समर में कूद पड़े. विद्याकर कवि कांग्रेस पार्टी के साधारण कार्यकर्त्ता से यात्रा प्रारंभ कर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटि के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्रिमंडल सदस्य के रूप में विशिष्ट सेवा प्रदान किये. वर्ष 1957 से 1967 तक विधान परिषद सदस्य रहे एवं वर्ष 1967 से 1977 तक आलमनगर विधान सभा का प्रतिनिधित्व कर शिक्षा मंत्री एवं पथ निर्माण मंत्री पद को सुशोभित किया. वह दोनों सदनों में तार्किक प्रस्तुतिकरण और बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते थे. यहां तक कि अपनी ही सरकार की गलत नीति की आलोचना से भी नहीं चूकते थे. वह बिहार कांग्रेस की धुरी जीवन पर्यन्त बने रहे. वर्ष 1969 में जब प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति दयनीय चल रही थी, तो इन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटि के अध्यक्ष का पदभार पार्टी द्वारा इन्हें सौंपा गया जिसे बखूबी इनके द्वारा निभाया गया. कवि ने अपने क्षेत्र में सर्वागिंण विकास में अमूल्य योगदान दिया जो अविस्मरणीय एवं मील का पत्थर है.
एनएच 106 कवि की देन . कवि ने ही इस अति पिछड़े क्षेत्र में वीरपुर- बिहपुर पथ की सामरिक महत्ता को बताते हुए इसे राजपथ का दर्जा देने के लिए बिहार विधान सभा में पारित करवाकर केन्द्र की स्वीकृति के लिए भेजा गया था. इसके अलावा आलमनगर क्षेत्र का दक्षिणी भाग जो हर वर्ष बाढ़ के तांडव से त्रस्त रहता था. मुख्यालय से भू भाग के अंतिम छोर तक सड़क मार्ग का निर्माण इन्होंने कराया. इस सड़क को क्राईम कंट्रोल रोड के नाम से आज भी जाना जाता है.
