20 फरवरी तक सिंहेश्वर मंदिर परिसर व शिवगंगा का सौंदर्यीकरण पूरा हो जायेगा तो सीएम 24 फरवरी को महाशिवरात्रि मेला व सिंहेश्वर महोत्सव का उद्घाटन करने जरूर आयेंगे. ऐसा होते नहीं दिखता है. लोगों का कहना है कि तैयारी देख कर ऐसा लगता है कि सीएम सिंहेश्वर नहीं आ पायेंगे.
मधेपुरा/सिंहेश्वर : इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व 24 फरवरी को है. इस अवसर पर तीन दिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव का आयोजन किया जायेगा. करीब एक महीना ही इस दिन में शेष रह गया है. इस अवसर पर सिंहेश्वर स्थान में भव्य मेला लगता है. यह मेला करीब एक महीने तक मधेपुरा सहित आसपास के जिले सहित पड़ोसी देश नेपाल के लोगों को आकर्षित करता रहा है. मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. शिवगंगा का निर्माण शुरू हुआ तो बाहर के श्रद्धालु सहित स्थानीय लोगों में भी बड़ी प्रसन्न्ता थी कि इसके कारण सिंहेश्वर स्थान धार्मिक के साथ-साथ एक आकर्षक स्थल के रूप में विकसित हो सकेगा. ज्यादा से ज्यादा लोग आयेंगे तो उनकी आय में भी वृद्धि होगी. इस वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं को लगने लगा कि अब विकास की आस पूरी होगी.
उन्होंने घोषणा करते हुए कहा था कि अगर 20 फरवरी तक सिंहेश्वर मंदिर परिसर एवं शिवगंगा का सौंदर्यीकरण कार्य पूरा हो जायेगा तो वे 24 फरवरी को महाशिवरात्रि मेला एवं सिंहेश्वर महोत्सव का उद्घाटन करने जरूर आयेंगे, लेकिन अब लगता नहीं है कि मेला व महोत्सव के उद्घाटन पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सिंहेश्वर आ पायेंगे.
महाशिवरात्रि मेले में 35 दिन शेष : प्रशासन की ढुलमुल रवैये के कारण नहीं लगता है कि निर्धारित समय तक मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य पूरा हो पायेगा. क्योंकि पुराना धर्मशाला अब तक पुरी तरह से तोड़ा भी नही जा सका है. अब 20 फरवरी को लगभग 35 दिन ही शेष रह गया है. इतने कम दिनों के अंदर पुराना मकान तोड़कर नया भवन तैयार कर लेना असंभव सा प्रतित हो रहा है. अब देखना ये है कि 20 फरवरी तक कैसे सारे कार्य पुरे किये जाते है और मुख्यमंत्री का दुबारा सिंहेश्वर में आगमन होता है कि नही यह स्थानीय प्रशासन पर निर्भर करता है. हालांकि मुख्यमंत्री के दुबारा सिंहेश्वर आगमन से स्थानीय लोगों ने कई उम्मीदें लगा रखी थी कि अगर दुबारा मुख्यमंत्री का सिंहेश्वर आगमन होता है तो वो सिंहेश्वर को कुछ ना कुछ जरूर दे कर जायेंगे. अब ऐसे में ना ही सिंहेश्वर में सीएम का आगमन होगा और ना ही सिंहेश्वर को कुछ मिल पायेगा.
सीएम ने 2012 में भी दी थी सौगात : वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब सिंहेश्वर नाथ के दर्शन के लिए यहां आये तो उन्होंने पर्यटन विभाग की ओर से शिवगंगा निर्माण सहित अन्य सौंदर्यीकरण योजनाओं के निर्माण की घोषणा की. उन्होंने अपनी घोषणा को अमलीजामा देते हुए राशि का आवंटन कर दिया.
सीएम ने किया था सिंहेश्वर आने का वादा
पिछले वर्ष निश्चय यात्रा के दौरान 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने सिंहेश्वर में पूजा-अर्चना करने के बाद शिवगंगा घाट के पूरब साइड सीढ़ियां बनाने एवं घाट के चारों ओर अशोक का पौधा लगाने की बात कही थी. मौके पर स्थानीय लोगों ने जब शिवरात्रि के मौके पर सिंहेश्वर में लगने वाले मेले का उद्घाटन करने की बात कही तो उन्होंने मोहक अंदाज में मधेपुरा के डीएम मो सौहेल से कहा कि सभी कार्यों को अगर वो ठीक कर लेते है तो मेले का उद्घाटन करने आयेंगे. जिसपर डीएम ने सभी कार्यों को समय तक दुरुस्त कर लेने कि बात कही.
सीएम के निर्देश पर डीएम ने जारी किया फरमान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जाने के बाद दूसरे दिन ही डीएम मो सौहेल ने अपने साथ पटना के आर्कीटेक्ट आशीष कुमार को साथ लाकर सारे कार्यो को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया. डीएम ने सिंहेश्वर मंदिर पहुंच कर सभी आवश्यक कार्य करने के लिये संबंधित अधिकारी को दिशा निर्देश दिये. जिसमें मुख्य रूप से दो- तीन कामों पर ज्यादा जोर दिया गया पहला तो पूरब साइड से सीढ़ियां बनाना एवं सीढ़ियों के निचे खाली जगह को भरना था, दूसरा शिवगंगा से अधिकतम लेवल का निर्धारण कर पानी निकालने के लिये मंदिर के पीछे नदी तक 12 इंच मोटे लोहे के पाइप को लगाने एवं सोलर सिस्टम व बोरिंग कर मोटर लगाना शामिल था. जिसके लिये लोक स्वास्थ विभाग के अवर प्रमंडल पदाधिकारी को डीएम ने दो दिनों के अंदर स्टीमेट बनाकर देने का निर्देश दिया. तीसरा मंदिर के बगल में धर्मशाला का निर्माण कराना था. जिसके लिये भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को सात दिनों के अंदर टेंडर करवाने के साथ-साथ 20 फरवरी तक किसी भी तरह कार्य पूरा करने की बात कही.
2013 में शुरू हुआ निर्माण
शिवगंगा सौंदर्यीकरण कार्य का शिलान्यास छह जून 2013 को हुआ था. 18 महीने में दो करोड़ 65 लाख एक हजार की राशि की लागत से इस निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाना था. पहले चरण में तालाब के चारों ओर टो वाल बनाया जाना था. इसके बाद 33 लाख 20 हजार की लागत से तालाब के चारों ओर सैंड स्टुम पाथ वे बनाया जाना था. और 78 लाख 16 हजार में तालाब का शेड बनाया जाने की योजना थी.
सिंहेश्वर के लिए महत्वपूर्ण है शिवरात्रि
सिंहेश्वर स्थान में सैकड़ों वर्ष से महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. इसमें कोसी क्षेत्र के सभी आठ जिलों के अलावा मधुबनी, दरभंगा, भागलपुर सहित नेपाल से भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु यहीं मंदिर परिसर के आसपास डेरा डालते हैं. वे लोग भोजन का प्रबंध भी खुद ही करते हैं. चौठारी तक प्रवास के बाद ही वापस लौटते हैं.
