मधेपुरा : देश में विकास के जिस मॉडल को अपनाया गया है उसमें शहरीकरण केंद्र में है. विकास योजना बनाने वाले विद्वानों का मानना है कि एक शहर को विकसित करने से आस पास के सौ गांवों में भी विकास की किरण पहुंचेगी. इसलिए सरकार अपनी विकास योजनाओं में शहर के विकास को लेकर अच्छी खासी राशि का प्रावधान करती है. मधेपुरा में भी शहर विकास के नाम पर अरबों रूपये खर्च हो चुके हैं और करोड़ों हो रहे हैं.
शहर में कचरा प्रबंधन एक चुनौती होती है, इसलिए सफाई के मद में अच्छी खासी रकम खर्च की जाती है. मधेपुरा नगर परिषद भी सफाई के मद में प्रत्येक माह हजारों रूपये खर्च किये जाते है. इसके बावजूद शहर की सूरत साफ नजर नहीं आती. सड़कों के किनारे कचरे का अंबार लगा रहता है. प्रभात खबर ने इससे पहले भी शहर के इस गंभीर मुद्दे को गंभीरता से उठाया था. लेकिन इसका कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है. हर तरफ गंदगी का आलम है.
नहीं गंभीर है संस्था: नगर परिषद ने शहर के 15 वार्डों की सफाई की जिम्मेदारी एक स्वयं सेवी संस्था को दी है. इस संस्था को प्रत्येक माह लाखों रूपये का भुगतान भी किया जाता है. लेकिन स्वयं सेवी संस्था सफाई के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है.
15 वार्ड संस्था के जिम्मे : हाल के वर्षों में नगर परिषद ने 15 वार्डों के साफ सफाई का जिम्मा बांका की एक स्वयं सेवी संस्था जीवन ज्योति को दिया गया है. शुरू में सफाई का मामला ठीक रहा लेकिन बाद में स्थिति बदहाल हो गयी.
प्रभात खबर द्वारा प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए संबंधित संस्था के सचिव से जवाब तलब किया गया है और समय पर कचरा उठाव के लिए ताकीद की गयी है.
लगा रहता है कचरा
शहर के मुख्य बाजार में पूर्णिया गोला चौक से लेकर सुभाष चौक तक कई जगह पर कचरे का ढेर लगा रहता है. मधेपुरा होटल के समीप से गुजरने पर लोगों की सुबह खराब हो जाती है. बैंक रोड में भी नियमित सफाई नहीं हो रही है. कचरे पर विचरते सुअरों के झुंड और बदबू के कारण लोग दूर से ही निकल जाते हैं. सर्किट हाउस के ठीक सामने कचरा स्थल बना दिया गया है.
