शहरवासियों पर छायी संक्राति की खुमारी

मधेपुरा : स्नान दान और ध्यान का अनुपम त्योहार मकर सक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है. शहरवासी इस त्योहार को दो दिन मना रहे हैं. पंचाग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाना है. हालांकि आम तौर पर इस त्योहार को 14 जनवरी के दिन मनाने […]

मधेपुरा : स्नान दान और ध्यान का अनुपम त्योहार मकर सक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है. शहरवासी इस त्योहार को दो दिन मना रहे हैं. पंचाग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाना है. हालांकि आम तौर पर इस त्योहार को 14 जनवरी के दिन मनाने की परंपरा रही है.

हालांकि, पंचाग के अनुसार दिन में फर्क होने के कारण इसका असर बजार पर भी देखा जा रहा है. त्योहार की तिथि निश्चित नहीं रहने के कारण दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ नहीं जुट पा रही है. शहर के मैन रोड स्थित तिलकुट विक्रेता जीवन कुमार ने बताया कि इस वर्ष 13 जनवरी को मामूली विक्री हुई.

14 को तिलकूट और लाय के बिक्री में इजाफा हुआ है. बाकी अंतिम दिन बिक्री होने की उम्मीद जतायी जा रही है. वहीं तिलकूट विक्रेताओं की मानें तो गत वर्ष की भांति इस वर्ष तिलकूट डिमांड में नहीं रहा. हालांकि इसका सटीक कारण महंगाई भी माना जा रहा है. हालांकि लोक आस्था के इस महापर्व पर मंहगाई कोई खास असर नहीं दिखा पा रही है. 14 जनवरी को भी त्योहार मनाने वालों की संख्या कम नहीं थी. शहर के कई जगहों पर चुड़ा दही के लंगर का आयोजन भी किया गया था.

अधिकतर आज मना रहे है संक्रांति का त्योहार . मकर संक्रांति का त्योहार हमारी पौराणिक सभ्यता और संस्कृति का द्यौतक भी है. इस त्योहार को आम से लेकर खास तक काफी उत्साह से मनाते है. त्योहार के दिन एक तरह से अघोषित छुटटी का दिन होता है. इस वर्ष मिथिला पंचाग के अनुसार त्योहार मनाने की तिथि में हुए फेर बदल पर शहर की गृहणियों ने अपनी – अपनी प्रतिक्रिया दी. गृहणी रेणु कुमारी ने कहा कि वर्षों से हम यह त्योहार 14 जनवरी को मनाते आये है.
गत वर्ष भी 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाया गया था. इस बार दो तिथि होने के कारण हमलोग दोनों दिन त्योहार मनाने का निर्णय लिये है. वहीं गृहणी निभा झा ने बताया कि पूजा पाठ और त्योहार सदियों से पंचाग के हिसाब से ही मनाते आये है. जब पंचाग 15 जनवरी को मकर संक्रांति लगने की बात कह रहा है तो 15 को ही त्योहार मनायेंगे. गृहणी सोमा मोदी ने कहा कि आम धारणा है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाया जाता है. लेकिन पंचाग के अनुसार त्योहार मनाते आये है.
इसलिए 15 को त्योहार मनायेंगे. गृहणी मीरा देवी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन कुल देवता की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कुलदेवता को तील प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है. मकर संक्रांति पंचाग के हिसाब से ही मनाया जाना चाहिए. गृहणी मीरा सर्राफ ने बताया कि यह त्योहार स्नान, दान और ध्यान के प्रतीक में मनाया जाता है.
इन सब चिजों को करने के लिए बस मन और उत्साह की जरूरत है. हम इस त्योहार को दोनों दिन मना सकते है. गृहणी रूबी राज ने बताया कि मकर संक्रांति कुल देवता की पूजा अर्चना का त्योहार है. हालांकि वर्षों से यह त्योहार 14 जनवरी को ही मनाते आये है. लेकिन इस बार 15 जनवरी को मनायेंगे.
7:21 से शुरू होगी संक्रांति . प्रसिद्ध पंडित कलानंद झा बताते है कि मिथिला पंचाग के अनुसार शुक्रवार की सुबह 07:21 मिनट पर संक्रांति लगता है. इस दौरान सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करेगा. इस दौरान सभी शुभ कार्य आरंभ किये जा सकते है. वहीं व्रत रखने वाले 01:31 मिनट दोपहर तक निर्जला व्रत रख सकते है. पंडित कलानंद के अनुसार इस दिन निर्जला व्रत रखने से काफी पूण्य मिलता है. वहीं रुके हुए कार्यों का आसानी से समाधान हो जाता है.

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