मधेपुरा : सदर अस्पताल में दर्जनों एंबुलेंस बेकार पड़ी है. जिसे देखने के लिए अस्पताल प्रशासन को फुर्सत नहीं है. ज्ञात हो कि मुख्यालय के सदर अस्पताल में सिर्फ तीन एंबुलेंस चलन प्रक्रिया में है, जबकि जिला के अस्पताल में कम से कम चार से पांच एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए.
वहीं अस्पताल में एक शव वाहन रहने से दो या तीन शव आ जाने से परिजन को परेशानी होती है. वही कुछ परिजनों का कहना है कि अगर अस्पताल में बेकार पड़ी एंबुलेंस को ठीक करा दिया जाए तो इन परेशानियों से जूझना नहीं पड़ेगा.
इस बाबत मरीजों के परिजनों द्वारा अस्पताल के अधिकारियों को कहा भी है लेकिन इस पर कोई भी पहल नहीं दिखती है. अगर खराब पड़ी एंबुलेंस को मरम्मत करा दिया जाय तो बाहरी एंबुलेंस का नहीं सहारा लेना पड़ेगा. सभी एंबुलेंस के क्षेत्र में जाने के बाद अगर कोई बड़ी दुर्घटना आ जाती है तो मरीजों को ले जाने के लिए परिजनों को बाहरी एंबुलेंस या फिर प्राइवेट गाड़ी की व्यवस्था करनी पड़ती है. वहीं पीएचसी से जो एम्बुलेंस आती है मानों जैसे उनका कबाड़ा निकला हुआ हो.
प्राइवेट एंबुलेंस की कट रही है चांदी
एबुलेंस की ऐसी हालत होती है जिसको बयां ही नहीं किया जा सकता है. न तो उसका गेट ठीक होती है और न ही एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था होती है. कभी कभी तो सदर अस्पताल आने के क्रम में ही रास्ते में ही एंबुलेंस बंद पड़ जाती है. इसके बाद रास्ते में एंबुलेंस को किसी तरह से मरम्मत कराकर मरीजों को सदर अस्पताल तक लाया जाता है.
परिवहन विभाग से एमवीआइ भी सदर अस्पताल में पहुंच सभी एंबुलेंस की निरीक्षण किया था और रिपोर्ट की मांग की गयी थी. सिविल सर्जन ने बताया कि पटना के नंबर के चलते सभी का टैक्स के रिपोर्ट तैयार नहीं करवाया जायेगा. तैयार होने के बाद सभी को एंबुलेंस को निलाम कर दी जायेगी.
सदर अस्पताल परिसर में कई एंबुलेंस पीएचसी का है. वहां जगह की कमी कारण यहां लगा दिया गया है. सरकार आदेश मिला है कि अगर 1.50 लाख से ऊपर किसी एंबुलेंस के मरम्मत में लगता है, तो उसे ठीक नहीं कराया जायेगा. उससे रद्दीकरण में हटा दिया जायेगा.
शैलेंद्र कुमार, सीएस सदर अस्पताल, मधेपुरा
