कुमार आशीष, मधेपुरा : गुरुवार को मधेपुरा जिला अपने स्थापना का 38 वर्ष पूरा करेगी. आज से 38 वर्ष पहले नौ मई 1981 को मधेपुरा जिला के रूप में अस्तित्व में आयी थी. जिला बनने के बावजूद मधेपुरा की बनावट सिटी के स्वरूप में ढ़लने के बजाय कस्बाई इलाके की तरह ही बनी रही. सियासत के गलियारे में हमेशा शोर मचाने वाली मधेपुरा की आवाज विकास के मापदंड पर अब भी गति नहीं पकड़ सकी है.
हवाई अड्डा व फूड प्रोसेसिंग यूनिट से पूरी होगी हसरत, रेलवे के विस्तार की उम्मीद
कुमार आशीष, मधेपुरा : गुरुवार को मधेपुरा जिला अपने स्थापना का 38 वर्ष पूरा करेगी. आज से 38 वर्ष पहले नौ मई 1981 को मधेपुरा जिला के रूप में अस्तित्व में आयी थी. जिला बनने के बावजूद मधेपुरा की बनावट सिटी के स्वरूप में ढ़लने के बजाय कस्बाई इलाके की तरह ही बनी रही. सियासत […]

हालांकि समय-समय पर जिले के जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक गतिमान बनाने की कोशिश करते रहे है. इसके बावजूद स्थापना के 38 साल बाद भी दिल्ली व पटना से चलने वाली विकास को सरजमीं पर उतारने के लिए लोग भगीरथ प्रयास की उम्मीद लगाये हुए है.
फिलवक्त रेल इंजन कारखाना, बीएनएमयू, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण से शुरू हुई कवायद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. नये वर्ष में लोगों को उम्मीद है कि मधेपुरा में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के अलावा हवाई अड्डे का निर्माण होने से विकासशील नीति को पंख लग सकते है. ऐसे में मधेपुरा की सफल व समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की कवायद की जा सकती है.
फूड प्रोसेसिंग से बदल सकती है तकदीर:
कहते हैं कि बगैर आर्थिक आजादी को हासिल किये विकास की बातें बेमानी साबित होती है. ऐसे में फूड प्रोसेसिंग यूनिट के खुलने से मक्का व मखाना आधारित किसानी को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र के लोगों को रोजगार का जरिया उपलब्ध कराया जा सकता है.
मक्का और गन्ना की यहां बहुतायत से खेती की जाती है. किसानों को फसल की वाजिब कीमत नहीं मिलने के कारण खेती की प्रवृत्ति भी क्षेत्र में कम होने लगी है. छोट स्तर के किसान रोजी रोजगार के चक्कर में अन्यत्र प्रवास करने लगे है.
सड़क के नाम पर होती है किरकिरी: मधेपुरा जिले के अंदर से दो नेशनल हाइवें गुजरती है. पहला एनएच 106 की हालत अब पैदल चलने के लायक भी नहीं रह गयी है. कुछ दिन पूर्व मधेपुरा पहुंचे उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने भी सड़क की जर्जरता को देख सरकार की व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की थी. इसके बावजूद एनएच 106 का काम शुरू नहीं किया गया है.
दूसरी तरफ पूर्णिया को भाया मधेपुरा से सहरसा तक जोड़ने वाली एनएच 107 की हालत हमेशा राष्ट्रीय स्तर की खबर बनती रही है, लेकिन इन दिनों एनएच 107 पर शुरू हुए दोहरीकरण के काम को होता देख लोग बेहतर व सपाट सड़कों पर चलने की उम्मीद लगाये हुए है. इसके अलावा शहरी क्षेत्र की अन्य सड़कों की हालत भी तंदरूस्त नहीं मानी जायेगी.
धार्मिक स्थल की बढ़ रही महत्ता: देश में प्रसिद्ध बाबा सिंहेश्वर स्थान के जरिये भी मधेपुरा की पहचान है. राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष सिंहेश्वर में राजकीय महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है.
इसके अलावा सिंहेश्वर में शिवरात्री के मौके पर एक महिना तक लगने वाला मेला भी राज्य भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है. जिले के चौसा प्रखंड स्थित बाबा विशु राउत स्थान में भी राजकीय मेले का आयोजन होने से क्षेत्र की पहचान धार्मिक क्षेत्र में भी स्थापित हुई है.
हवाई अड्डा बनने पर उड़ान की संभावना:
औद्योगिक व शैक्षणिक विकास के बाद भी मधेपुरा हवाई सेवा के नाम पर ठगा महसूस कर रहा है. हवाई किराया कम होने की वजह से हवाई जहाज पर सफर करने वाले लोगों की तादाद बढ़ी है. ऐसे में मधेपुरा के लोगों को सफर का लुत्फ लेने के लिए पटना तक की दूरी तय करनी होती है. जबकि मधेपुरा में हवाई अड्डा के निर्माण से व्यवसायिक गतिविधि की संभावना प्रबल हो सकती है.