सहरसा : कोसी का प्रमंडलीय अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल में मरीजों को दवाई के अलावे पीने के लिए पानी की भी व्यवस्था करनी पड़ती है. यह सुनने में अटपटा जरूर लगा होगा, लेकिन यह सच्चाई है. भीषण गर्मी के बाद भी सदर अस्पताल के कई चापाकल खराब हैं तो ओपीडी व ऑपरेशन थियेटर के सामने लगा फ्रीजर बंद पड़ा है. जिसके कारण आम मरीजों को या तो सीलबंद पानी या परिसर स्थित दुकानों में लगाये गये चापाकल पर जाना मजबूरी बनी हुई है.
लेकिन अस्पताल प्रशासन बेफिक्र बना हुआ है. जिसे देखने का समय अस्पताल प्रशासन से लेकर वरीय अधिकारियों को नहीं है. लोग जिस उम्मीद से अपनी आर्थिक स्थिति को देख इलाज के लिए सदर अस्पताल आते है. यहां आने के बाद नाम बड़ा व दर्शन छोटा चरितार्थ हो रहा है.
देना होगा स्वीच व चापाकल में पानी : सदर अस्पताल में प्रतिदिन दर्जनों गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए पहुंचते है. जिसके साथ परिजन भी रहते है. वही प्रसव वार्ड के बगल में ही नवजात बच्चों की देखरेख के लिए एसएनसीयू भी बनाया गया है. जरूरतमंद नवजातों को चिकित्सक के सलाह पर एसएनसीयू में भरती कराया जाता है.
नवजात की देखरेख के लिए वार्ड के बाहर में भी उसके परिजन रहते है. भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए परेशान रहते है. दोनों वार्ड के सामने लगा चापाकल खराब है. लोगों ने बताया कि यदि आपको प्यास लगा है तो पहले कही से पानी का व्यवस्था कर चापाकल में डालना पड़ता है. जिसके बाद चापाकल से पानी निकलता है.
वही यदि ठंडा पानी पीना हो तो आपातकालीन वार्ड के सामने ऑपरेशन थियेटर के पास लगे फ्रीजर का स्वीच देकर कम से कम आधा घंटा इंतजार करना होगा. उसके बाद ही आपको ठंडा पानी नसीब होगा. इतने देर में लोग अपनी प्यास को बुझाने के लिए मजबूरीवश दुकान से ठंडा पानी का बोतल खरीद कर ले आते है.
लोग समझ बैठते हैं खराब
चापाकल में पानी डाल कर चलाने व ठंडा पानी के लिए स्वीच देकर आधा घंटा इंतजार करने की जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं है. जिसके कारण लोग उसे खराब समझ बैठते है. मरीजों के परिजनों ने बताया कि कई दिनों से चापाकल से पानी गायब हो रहा है.
अस्पताल प्रशासन को जानकारी रहने के बावजूद इसे दुरूस्त कराने की दिशा में कोई पहल नहीं किया जा रहा है. लोगों ने कहा कि न ही चापाकल में पानी डालने व फ्रीजर का स्वीच देने की कोई नोटिस भी कही चिपकाया नहीं गया है. जिसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है.
मरीजों को उठाना पड़ता है आर्थिक बोझ
सदर अस्पताल की अव्यवस्था के कारण कोई भी अस्पताल इलाज कराने आना नहीं चाहते है. आर्थिक रूप से कमजोर व पुलिस मामले के मरीज ही इलाज के लिए सदर अस्पताल आते है. बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले इस क्षेत्र में लोग आर्थिक रूप से कमजोर है.
अधिकांश लोग निजी नर्सिंग होम का खर्च सहन करने में अपने आपको असक्षम महसूस करते हैं. बावजूद यदि उन्हें पानी खरीद कर पीना पड़ें तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है.
