अस्पताल में बिचौलिये हावी, मरीजों का हो रहा शोषण

मधेपुरा : बिचौलियों का जाल सदर अस्पताल का महिला वार्ड इमरजेंसी वार्ड बिचौलियों दिन भर चक्कर लगाते रहते हैं. इस वार्ड के इर्द-गिर्द कई डॉक्टरों के बिचौलिये दिन भर चक्कर लगाते रहते हैं, जो विभिन्न ईलाकों से आये ग्रामीण मरीजों के परिजनों को बहला- फुसलाकर अपने डॉक्टरों के क्लिनिक को नर्सिंग होम में ले जाते […]

मधेपुरा : बिचौलियों का जाल सदर अस्पताल का महिला वार्ड इमरजेंसी वार्ड बिचौलियों दिन भर चक्कर लगाते रहते हैं. इस वार्ड के इर्द-गिर्द कई डॉक्टरों के बिचौलिये दिन भर चक्कर लगाते रहते हैं, जो विभिन्न ईलाकों से आये ग्रामीण मरीजों के परिजनों को बहला- फुसलाकर अपने डॉक्टरों के क्लिनिक को नर्सिंग होम में ले जाते हैं. जहां मरीजों का आर्थिक दोहन किया जाता है. ऐसे में कई मरीजों की जान पर बन आती है. मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर पुनः

उन्हें सदर अस्पताल में पहुंचा दिया जाता है. इन विषयों पर नकेल कसने में अस्पताल प्रशासन विफल साबित होता रहा है. सदर अस्पताल में बाहरी डॉक्टरों के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक बिचौलिया अस्पताल के महिला वार्ड, इमरजेंसी वार्ड में मंडराते रहते हैं.
इन बिचौलियों में अधिकांश महिलाएं भी होती है. जैसे ही किसी मरीज की गाड़ी आकर रूकती है और दौड़कर बिचौलिया सहानुभूति बटोरने में जुड़ जाती है. मौका पाकर ही महिला मरीजों और पुरुषों के परिजनों को डराने का सिलसिला शुरू होता है.
इसलिए कई प्रकार की उदाहरण देकर मौत का डर दिखाकर अपने कब्जे में ले कर बाहरी डॉक्टर के पास लेकर चला जाता है. अस्पताल का हर आदमी जानता है कि कौन किस डॉक्टर के लिए काम करता है. कई बार मरीजों के सहयोग से कई महिला और पुरुष भी पकड़े भी जा चुके हैं. इसके बावजूद बिचौलियों का खेल जारी है.

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