एटीएम के लिए नहीं मिल रहा कैश
मधेपुरा : एटीएम व्यवस्था का बुरा हाल है. कहीं बंद तो कहीं ग्राहकों की लंबी कतार.शहर में लगी अधिकतर एटीएम या तो खराब हैं या उनमें कैश नहीं है. महीने का पहला सप्ताह बैंक ग्राहकों पर भारी पड़ रहा है. वेतन तो खाते में आ गया है, लेकिन इसकी निकासी मुश्किल हो गयी है. लोग […]
मधेपुरा : एटीएम व्यवस्था का बुरा हाल है. कहीं बंद तो कहीं ग्राहकों की लंबी कतार.शहर में लगी अधिकतर एटीएम या तो खराब हैं या उनमें कैश नहीं है. महीने का पहला सप्ताह बैंक ग्राहकों पर भारी पड़ रहा है. वेतन तो खाते में आ गया है, लेकिन इसकी निकासी मुश्किल हो गयी है. लोग एटीएम-दर-एटीएम भटक रहे हैं.
तीन-चार जगह जाने पर किस्मत अच्छी रही तो रुपया निकल गया वरना खाली. एटीएम व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है. जिस एटीएम में पैसे रहते हैं, उनमें लंबी कतार लग जा रही है. कुछ देर में वहां भी ‘नो कैश’ बोर्ड लटक जा रहा है. बैंक से मिली जानकारी के अनुसार दो व पांच सौ तथा दो हजार रुपये के नोट बैंक से निकासी के बाद वापस नहीं मिल रहे है. इस वजह से बैंक एटीएम में रुपया डालने को लेकर हाथ खड़ी कर चुकी है.
निजी बैंकों की भी हालत खराब:
बड़े नोटों के लेनदेन के मामले में निजी बैंकों की हालत राष्ट्रीयकृत सरकारी बैंकों से भी खराब है. इन बैंकों के एटीएम बीते दो-दो महीने से बंद है. इनके एटीएम में रुपया नहीं मिलने से निजी बैंक के ग्राहक भी एसबीआइ के एटीएम पर निर्भर है. इसके कारण एसबीआइ द्वारा कैश लोड करने के बावजूद उपभोक्ताओं के लंबी कतार के सामने एटीएम नियमित सेवा नहीं दे पा रही है.
काउंटर पर मुश्किल से हो रही पूर्ति
कोसी क्षेत्र के लीड बैंक एसबीआइ की क्षेत्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों मधेपुरा सहित सुपौल व सहरसा के सभी सरकारी बैंकों में बड़े नोटों की किल्लत देखने को मिल रही है. बैंक में जमा करने वाले उपभोक्ता भी ज्यादा संख्या में छोटे नोट डिपोजिट कर रहे है. उन नोटों से बैंक के ग्राहकों को काउंटर पर ही नकद राशि देकर निकासी व्यवस्था को कायम रखी जा रही है. बैंक द्वारा बीते महीने में एटीएम के माध्यम से लगभग एक हजार करोड़ रुपये के बड़े नोट बाजार में खंपाये जा चुके है.
डिजिटल लेन-देन को दें प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार कोसी क्षेत्र में महज तीन फीसदी लोग ही विभिन्न माध्यमों से डिजिटल लेनदेन को प्राथमिकता दे रहे है, जबकि इस प्रक्रिया को ज्यादा संख्या में अपनाने से उपभोक्ता की बैंक व एटीएम पर निर्भरता कम होगी. इसके बावजूद स्थानीय लोग नकद लेनदेन को ज्यादा महत्व दे रहे है. शायद यही वजह है कि लोग जरूरत के समय के लिए बड़े नोट घरों में ही रखने की प्रवृत्ति बना चुके हैं.
रिजर्व बैंक को समस्या से कराया अवगत
भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रशांत बरियार ने कहा कि एटीएम में लोड करने के लिए बड़े नोटों की समस्या हो गयी है. बैंक को बाजार से बड़े नोट कम मिल रही है. इस वजह से एटीएम को सुचारु रूप से चलाने में परेशानी हो रही है. इस परेशानी से भारतीय रिजर्व बैंक को अवगत कराते अतिरिक्त फंड की मांग की गयी है. बैंक का लगभग एक हजार करोड़ रुपया बाजार में रुकी हुई है. ग्राहकों को जागरूक होने की आवश्यकता है.