काम के अनुरूप नहीं दिया जा रहा है वेतन
सिंहेश्वर : प्रखंड कार्यालय परिसर में आशा, सेविका, सहायिका व ममता की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष विभा देवी ने की. बैठक में सहरसा प्रखंड अध्यक्ष गुड़िया देवीव अन्य ने मुख्य अतिथि सांसद रंजीत रंजन को प्रतीक चिह्न व बुके देकर सम्मानित किया. बैठक में गुड़िया ने सांसद को बताया कि आप महिलाओं की […]
सिंहेश्वर : प्रखंड कार्यालय परिसर में आशा, सेविका, सहायिका व ममता की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष विभा देवी ने की. बैठक में सहरसा प्रखंड अध्यक्ष गुड़िया देवीव अन्य ने मुख्य अतिथि सांसद रंजीत रंजन को प्रतीक चिह्न व बुके देकर सम्मानित किया. बैठक में गुड़िया ने सांसद को बताया कि आप महिलाओं की समस्या को सांसद नहीं महिला की हैसियत से उनके हित के लिए सदन में उनकी आवाज को उठाये. सभी ने एक स्वर में कहा कि काम के अनुरूप उन्हें मानदेय नहीं दिया जाता है.
जिससे उनके परिवार को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ता है. सेविका ने बताया किया कि विभाग के ओर से चावल के लिए 15 रुपया व दाल के लिए 40 रुपया दिया जाता है ऐसे में कैसे समुचित पोषाहार का वितरण किया जाये. इस दर में कहीं भी चावल व दाल नहीं मिल पाता है. वहीं आशाओं ने कहा कि कभी – कभी मध्य रात्रि में भी अस्पताल जानी पड़ती है, लेकिन आशाओं को ठहरने के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है.
मौके पर अर्चना कुमारी, मधु सिन्हा, बेबी कुमारी, विभा कुमारी, रंजु कुमारी, संतोष कुमारी, सांधना कुमारी, मंजु कुमारी, नीभा कुमारी, कुमारी निलम, विभुति सिंह, समीम खां, मनोज यादव, विरेन्द्र कुमार, अनिल सिंह, किशोर, बिनोद, रमेश, सुरेश मंडल, महेश्वरी मेहता, राजीव कुमार बबलु, मुकेश यादव, आशीष यदुवंशी, अरुण यादव, रमेश यादव, राजेंद्र यादव, राजू घोष, सूर्यनारायण यादव, कामेश्वर सिंह आदि मौजूद थे.
आशा-सेविका की बदौलत पोलियो मुक्त हुआ भारत
सांसद ने कहा उनके द्वारा सदन में चार बार इस मुद्दे को उठाया गया है कि अन्य प्रदेशों में अभी जहां 16 से 18 हजार रुपये वेतन मिलते है. वहीं बिहार में दिन के हिसाब से लगभग सेविका को एक सौ रुपया, सहायिका को 50, आशा को 25 रुपया दिया जाता है. जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देश दिया गया है कि एक मजदूर को न्यूनतम 350 रुपया मिलना चाहिये. सीडीपीओ की महीने में तीन से चार लाख कमाई होती है. जो कि एक चेन में बटा होता है. जब कार्रवाई कि बारी आती है तो सेविका पर ही गाज गिरता है. कोई सेविका अगर कमीशन नहीं देती है, तो उसके केंद्र की जांच तुरंत हो जाती है और उस सेविका को चयनमुक्त कर दिया जाता है. सरकार का सबसे बड़ा घोटाला 15 हजार पांच सौ में 40 बच्चों के साथ- साथ पोषाहार का वितरण महीने में किया जाना घोटाले को दर्शाता है. 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक सदन में महिलाओं को होने वाले सभी समस्याओं से अवगत करायेंगे. वहीं सभी को सरकारी मान्यता व ड्यूटी का समय बांधने का उठायेंगे.