दिव्यांग को भी नहीं छोड़ा, चुरा ली ट्राइसाइकिल

मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित शिव मंदिर के पास से एक दिव्यांग की ट्राइसाइकिल बुधवार की रात्रि हो गयी है. अखबार बेच कर अपना जीवन यापन कर रहे उक्त दिव्यांग की हालत विक्षितों जैसे हो गयी है. उसे नित्य क्रिया जाने में भी परेशानी हो रही है. ट्राइसाइकिल ही उसके कहीं आने जाने का व […]

मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित शिव मंदिर के पास से एक दिव्यांग की ट्राइसाइकिल बुधवार की रात्रि हो गयी है. अखबार बेच कर अपना जीवन यापन कर रहे उक्त दिव्यांग की हालत विक्षितों जैसे हो गयी है. उसे नित्य क्रिया जाने में भी परेशानी हो रही है. ट्राइसाइकिल ही उसके कहीं आने जाने का व जीविका का एक मात्र सहारा था.

वह रो रो कर ट्राइसाइकिल के लिए गुहार लगा रहा है. दिव्यांग ने गुरुवार को तीन बजे तक भोजन का एक निवाला तक नहीं लिया था. वह कहता है कि बगैर ट्राइसाइकिल के वह नित्य क्रिया के लिए भी नहीं जा पायेगा. इस बाबत सामाजिक सुरक्षा कोषांग के निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि ट्राइसाइकिल प्रखंड को उपावंटित किया जाता है.

चोरी की रिपोर्ट के आधार पर ट्राइसाइकिल दिया जा सकता है. वहीं मामले की सूचना मिलने पर सदर थानाध्यक्ष केबी सिंह ने दिव्यांग के पास पुलिस अधिकारी को भेज कर उसका आवेदन लेकर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इस मामले को लेकर जिला मास्टर मेंटर शिक्षक यादव विक्रम ने भी स्थानीय लोगों को जानकारी देकर मदद का आग्रह किया. वहीं दिव्यांग को तत्काल नाश्ता कराया. ट्राइसाइकिल खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय तौर पर दिव्यांग को मुहैया नहीं कराया जा सका.

ललन ने भीख मांगने की जगह मेहनत कर जीविका की तलाश को दी प्राथमिकता. दिव्यांग मधेपुरा व पूर्णिया के सीमा पर स्थित पूर्णिया जिले के जानकीनगर थाना अंतर्गत चांदपुर भंगहा गांव निवासी कमलेश्वरी पासवान का पुत्र ललन पासवान है, जो दोनों पैर से नि:शक्त है. वहीं वर्षों से मधेपुरा में रहकर कुछ न कुछ कार्य कर अपना भरण पोषण कर रहा था. ललन ने बताया कि तीन महीने से अखबार बेच कर किसी तरह अपना भरण पोषण करते है. उन्होंने बताया कि हर दिन की भांति बुधवार को भी अखबार बेच कर शिवमंदिर के बरामदे पर सो गया. उसकी नींद जब दो बजे खुली तो देखा कि ट्राइसाइकिल था, लेकिन पुन: ढाई बजे जब वह जगा तो ट्राइसाइकिल गायब था.
ललन ने कहा कि हम लोगों की राह देखने लगे कि कोई आयेगा, तो वह अपने ट्राइसाइकिल के बारे में पूछे गया. सुबह होने पर हर आते जाते लोगों से ट्राइसाइकिल के बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी ने उसके मदद को आगे नहीं आये. वह निराश होकर शिवमंदिर के बरामदे में पूरे दिन बैठे रहे.
मंदिर का बरामदा है तीन माह से दिव्यांग की आश्रयस्थली, अखबार बेचकर करता था गुजारा
स्वरोजगार कर जीविका चला रहा था दिव्यांग, ट्राइसाइकिल चोरी के बाद रोजगार से लेकर नित्य क्रिया जाने में हो रही परेशानी
लोगों ने मेंटर शिक्षक के प्रयास से किया ट्राइसाइकिल खरीदने के लिए पहल लेकिन खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण नहीं मिल सकी दिव्यांग को ट्राइ साइकिल
शहर के मध्य में स्थित बाबा पलकेश्वरनाथ शिव मंदिर ललन का आसरा बना हुआ था. गत तीन महीने से वह यहीं रात्रि में रहता था, लेकिन बुधवार की रात उसके लिए काफी कष्टप्रद बन गयी. जब उसके कहीं आने-जाने के साथ जीविकोपार्जन का एक मात्र साधन ट्राइसाइकिल की चोरी हो गयी.

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