मधेपुरा : प्रभात खबर गत एक महीने से शहर में फर्जी नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान चला कर स्वास्थ्य विभाग की सोयी हुई चेतना को जगाने का प्रयास किया है. इसके बावजूद ललिता के मामले में फर्जी नर्सिंग होम के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. सदर अस्पताल में सक्रिय बिचौलिया के चक्कर में फंस कर ललिता अपने पेट में पल रहे बच्चे को गवां बैठी. सिंहेश्वर में इलाज के दौरान जब ललिता को सदर अस्पताल रेफर किया गया , तो बिचौलियों ने सहरसा जाने की सलाह दी.
दलालों के द्वारा आनन -फानन में ललिता को सहरसा ले जाया गया. सदर अस्पताल के दलालों ने ललिता सहरसा के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से लड़ने के लिए भर्ती करा दिया. यहां पर निर्धन के गरीबी का मजाक उड़ाते हुए कहा गया कि तीस हजार जमा करो नहीं तो मरीज मर जायेगी. आनन-फानन में तत्काल पांच हजार रुपया किसी तरह निर्धन ने जमा कराया. इसके बाद फिर 25 सौ रुपया. सहरसा में इलाज नहीं करके उसे डॉक्टर पटना लेकर चले गये. पटना में ललिता को दोबारा जिंदगी तो मिल गयी, लेकिन इलाज के नाम पर भारी भरकम पैसा जमा नहीं होने के कारण उसे बंधक बना कर रखा गया.
ललिता व निर्धन ने प्रभात खबर को बताया कि सहरसा के डॉक्टर ने कहा कि पटना में मेरा एक रिश्तेदार डॉक्टर है, वहां कम पैसे में उसकी जान बच जायेगी. फिर उसे सहरसा के डॉक्टर ने पटना में छोड़ कर गायब हो गया. रविवार को जब सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव बंधक बनी ललिता को छुड़ाने नर्सिंग होम पहुंचे, तो डॉक्टर के साथ-साथ नर्सिंग होम भी फर्जी निकला. फिलवक्त पटना के नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए पटना प्रशासन ने डॉक्टर व संचालक को हिरासत में ले लिया है. यहां सवाल उठता है कि आखिर कितने दिनों तक गरीब लोग फर्जी नर्सिंग होम के शिकार बनते रहेंगे. हाल फिलहाल ही मधेपुरा में फर्जी नर्सिंग होम की लापरवाही से तीन महिला की मौत हो चुकी है.
