सिंहेश्वर : सरकार स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए रोज नये-नये प्रोग्राम कर रही है. वही क्षेत्र के पीएचसी के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. सरकार के द्वारा प्रोग्राम तो जरूर चलाया जा रहा है, लेकिन अस्पताल में कर्मी के कमी है. 16 माह पूर्व पीएचसी को सीएचसी में भी तब्दील कर दिया तो लोगों को लगा कि बेहतर सुविधा मिलेगा, लेकिन वक्त के साथ इसकी स्थिति बदतर होती चली गयी. पीएचसी में चिकित्सक, एएनएम व कर्मियों की कमी है.
इस कारण न तो सही से चिकित्सीय सलाह मिल पाती है और न ही सरकार के द्वारा दी जाने वाली सुविधा का समुचित लाभ मिल पाता है. पूरे प्रखंड की आबादी लगभग एक लाख 64 हजार के करीब है, लेकिन अभी मात्र चार चिकित्सक ही अस्पताल पदस्थापित हैं. क्षेत्र में एक पीएचसी, दो अतिरिक्त पीएचसी व 19 स्वास्थ्य उपकेंद्र की मदद से स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराया जा रहा है. इनके लिये मात्र पांच चिकित्सक ही कार्यरत है, जबकि 19 स्वास्थ्य उपकेंद्र के लिए 38 में से मात्र नौ एएनएम ही कार्य कर रही है.
वैसे तो अस्पताल में एक आयुष चिकित्सक, प्रभारी सहित छह चिकित्सक है, लेकिन अभी स्थिति ऐसी है कि छह डाॅक्टर में से दो चिकित्सक डाॅ सुमन कुमार आयुष, जयकृष्ण कुमार अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हरी में पदस्थापित किया गया है. पीएचसी के लिए एक महिला डेंडल चिकित्सक, प्रभारी व दो अन्य डाॅक्टर मौजूद है. इसमें अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाॅ सुमन विमोक ट्रेनिंग के लिए पटना गये हुए है, जबकि पीएचसी में कार्यरत डाॅ राजकिशोर सिंह एक महीना के लिए ट्रेजरी ट्रेनिंग के लिए गये हुए है. आयुष चिकित्सक से काम लिया जा रहा है.
