दोषी पदाधिकारी पर कार्रवाई नहीं होने से अधिवक्ताओं में आक्रोश
मधेपुरा : जिले के वरीय अधिवक्ता नरेश मोहन झा के साथ अपर समाहर्ता मधेपुरा द्वारा किये गये गलत व्यवहार के मामले में कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ताओं में आक्रोश है. वहीं दूसरी तरफ अपर समाहर्ता के न्यायालय का अधिवक्ताओं ने बहिष्कार कर रखा है. इससे आमजनों को परेशानी हो रही है. ज्ञात हो कि अपर […]
मधेपुरा : जिले के वरीय अधिवक्ता नरेश मोहन झा के साथ अपर समाहर्ता मधेपुरा द्वारा किये गये गलत व्यवहार के मामले में कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ताओं में आक्रोश है. वहीं दूसरी तरफ अपर समाहर्ता के न्यायालय का अधिवक्ताओं ने बहिष्कार कर रखा है. इससे आमजनों को परेशानी हो रही है. ज्ञात हो कि अपर समाहर्ता मुर्शीद आलम द्वारा गत 14 जून को वरीय अधिवक्ता नरेश मोहन झा के साथ गलत व्यवहार के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने 16 जून को आपात बैठक की थी.
जिसमें यह निर्णय लिया गया कि जब तक प्रशासन अपर समाहर्ता के विरूद्ध कार्रवाई नहीं करती है. तब तक अपर समाहर्ता के न्यायालय का बहिष्कार जिला अधिवक्ता संघ करेगा और उनके न्यायालय में कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं होगा. इसके बाद अपर समाहर्ता के न्यायालय का बहिष्कार अब तक जारी है.
अधिवक्ता न्याय प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी
गत 14 जून को वरीय अधिवक्ता नरेश मोहन झा किसी मुकदमे का जवाब देने के लिए समय की मांग की तो अपर समाहर्ता ने जवाब देने के लिए समय देने से मना कर दिया और कहा कि अधिवक्ताओं को क्या हम बुलाने जाते हैं. जिला अधिवक्ता संघ के सचिव कृतनारायण यादव ने कहा कि इस तरह की घटना निंदनीय है. अधिवक्ता न्याय की प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी है. उन्होंने कहा कि इस घटना की जानकारी संघ ने डीएम, लोकायुक्त बिहार, मानवाधिकार आयोग, बार काउंसिल पटना, विधि मंत्रालय बिहार सरकार कमिशनर सहरसा को ही है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और विरोध जारी है. वरीय अधिवक्ता भूलोक चंद्र प्रसाद ने कहा कि अधिवक्ता के उपस्थित नहीं होने से पक्षकार अपना पक्ष उचित ढंग से नहीं रख पाते हैं. जिससे जनता न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत से वंचित रह जा रही है.
मामले का हो निष्पादन ताकि मिले सुगम न्याय
वरीय अधिवक्ता जवाहर झा ने कहा कि प्रशासन को मामला समय रहते सुलझा लेना चाहिये, ताकि आम जन सुगम न्याय पा सके. अधिवक्ता संजीव कुमार ने कहा कि 27 जून को धुरिया, रसलपुर निवासी गौरीशंकर चौधरी का मामला नामांकन हेतु था, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण नामांकन नहीं हो पाया ऐसी स्थिति में हो सकता है जमाबंदी विपक्षी के नाम से हो जाय.