मधेपुरा की घटना, बािरश से बचने के िलए एक घर में िछपे थे सभी
मुरलीगंज, मधेपुरा : मुरलीगंज विद्युत सब स्टेशन के पीछे खेत में 11 हजार वोल्ट प्रवाहित बिजली के तार गिर गया. इसकी चपेट में आकर तीन बच्चियां समेत छह लोगों की मौत हो गयी. खेत में मूंग तोड़ने के दौरान बारिश से बचने के लिए सभी एक चदरे के घर में आश्रय लिये हुए थे. इस दौरान तार टूट कर गिर गया और तेज चिनगारी व आवाज के बीच 11 हजार वोल्ट की चपेट में आकर छह लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. मौत से आक्रोशित लोगों ने एनएच 31 को जाम कर दिया. सूचना पर थानाध्यक्ष राजेश कुमार, बीडीओ अनुरंजन कुमार समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पर पहुंचे और शव को उठाने का प्रयास किया.
आक्रोशित लोगों ने शव उठने नहीं दिया और कहा कि जिस समय घटना हुई उस समय जब पावर सब स्टेशन के अधिकारी को तार गिरने की सूचना दी गयी, लेकिन कर्मी के द्वारा लाइन नहीं काटा गया. जब तक वरीय अधिकारी के द्वारा दोषी कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती और मृतक के परिजनों को मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक जाम अनवरत जारी रहेगा.
जानकारी के अनुसार मुरलीगंज विद्युत सब स्टेशन के पीछे के खेत में मूंग तोड़ने में कई मजदूर लगे थे. इस दौरान तेज बारिश होने लगी. बारिश से बचने के लिए सभी खेत के बीच में बने चदरा के एक घर के नीचे पहुंचे. कुछ ही पल बाद घर के ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की संचरण लाइन का तार टूट कर घर पर गिर गया. इसके कारण चारों ओर चिनगारी तथा झनझनाहट की आवाज आयी. सभी घबरा कर दौड़े और गिरे हुए बिजली के तार की चपेट में आ गये. इसमें मो नसीम की 13 वर्षीय पुत्री सहिस्ता खातून व आठ वर्षीय रोजी खातून, मो मुअशिल की 09 वर्षीय पुत्री मरजीना खातून, मो जमील की 45 वर्षीय पत्नी सेबून खातून, मो इबराहिम की पुत्री 25 वर्षीय सकीला खातून, मो खुर्शीद की पत्नी 30 वर्षीय अलीशा खातून की मौत हो गयी. मौत की खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गयी. मौके पर नपं के मुख्य पार्षद श्वेत कमल उर्फ बौआ जी, उपाध्यक्ष जगदीश साह, बाबा दिनेश मिश्र समेत अन्य लोग मौजूद थे. मुख्य पार्षद ने अविलंब जिला प्रशासन समेत अन्य अधिकारियों से बात कर मुआवजा दिलाने की मांग की. इसके बाद सदर एसडीएम संजय कुमार निराला वहां पहुंचे तत्काल पारिवारिक लाभ के तहत चार चार लाख देने की घोषणा की. इसके बाद जाम खत्म किया गया.
घटना के िवरोध में सड़क जाम
चार-चार लाख का मुआवजा
मुख्य पार्षद द्वारा मामले की जानकारी आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो चंद्रशेखर को दी गयी. मंत्री ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विद्युत विभाग से वार्ता की. इसके बाद विद्युत विभाग के अधिकारी हरकत में आये. सभी मृतक के आश्रितों के नाम चार-चार लाख का चेक बनाया गया.
