पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही लखीसराय का विद्यापीठ चौक पूरी तरह भक्तिमय और भगवामय हो गया है. सड़क मार्ग (NH-80) से होकर सुल्तानगंज की ओर जाने वाले कांवरिया वाहनों का यह मुख्य पड़ाव स्थल बन चुका है. दिन ढलते ही यहां कांवरियों के वाहनों का तांता लग जाता है, जिससे पूरा चौक बाबा भोलेनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है.
किऊल नदी में स्नान, फिर चाय-नाश्ते के साथ आगे की यात्रा
एनएच-80 होकर गुजरने वाले अधिकांश कांवरिया वाहन विद्यापीठ चौक पर विश्राम के लिए रुकते हैं.
- स्नान व विश्राम: विद्यापीठ चौक के ठीक किनारे किऊल नदी बहने के कारण श्रद्धालु यहां रुककर नदी में स्नान करते हैं और तरोताजा होते हैं.
- चाय-नाश्ते का केंद्र: स्नान करने के बाद कांवरिया चौक पर स्थित दुकानों में चाय और नाश्ता कर अपनी आगे की यात्रा शुरू करते हैं. खासकर शाम के वक्त यहां कांवरिया वाहनों की भीड़ काफी बढ़ जाती है.
- आगे का सफर: ये श्रद्धालु रात तक सुल्तानगंज पहुंच जाते हैं और वहां थोड़ा विश्राम करने के बाद अहले सुबह उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर जल उठाकर देवघर (बाबा धाम) के लिए पैदल यात्रा पर निकल पड़ते हैं.
भगवा ध्वज और वस्त्रों से सजा बाजार
सावन शुरू होते ही विद्यापीठ चौक का नजारा पूरी तरह बदल गया है. चौक पर चाय-नाश्ते और पूजन सामग्री की दुकानों के बाहर बांस-डंडों में बंधे भगवा झंडे लहराते नजर आ रहे हैं.
कांवरिया वाहन चालक इन दुकानों से अपनी गाड़ियों में लगाने के लिए भगवा ध्वज खरीदते हैं. इसके अलावा चौक पर कांवर, बोल-बम लिखे भगवा वस्त्र (टी-शर्ट, हाफ पैंट) और कांवर की सजावटी वस्तुओं की भी जमकर बिक्री हो रही है.
'कांवरियों की सुविधा के लिए दिन-रात खुली हैं दुकानें'
विद्यापीठ चौक के स्थानीय दुकानदार अजय साव ने बताया कि इस बार सावन की शुरुआत से ही कांवरिया वाहनों का आगमन काफी तेजी से हो रहा है.
देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने के कारण कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें 24 घंटे (दिन-रात) खुली रखने की व्यवस्था की है, ताकि कांवरियों को खान-पान या सामान खरीदने में कोई असुविधा न हो.
