लखीसराय की बौद्ध विरासत को बचाने की जरूरत

लखीसराय की बौद्ध विरासत को बचाने की जरूरत

सुनील कुमार, कजरा (लखीसराय)

इतिहास के पन्नों में दबा लखीसराय जिला विगत दिनों हुए कई जगहों की खुदाई व शोध के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है. बताया जाता है कि एक समय यह क्षेत्र बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र था. पूर्व में हुई खुदाई एवं पुरातात्विक खोजों ने भी इस बात की पुष्टि की है. लखीसराय जिला बौद्ध धर्म की गौरवगाथा को संजोये हुए है. यहां शोध और पर्यटन की असीम संभावनाएं है. सरकार, पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर यहां की बौद्ध विरासत को सहेजना चाहिये. लखीसराय को बौद्ध पर्यटन सर्किट में सम्मिलित किया गया तो यह सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ सकता है. इस इलाके को बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है. इस दिशा में राज्य सरकार व जिला प्रशासन की ओर से कुछ प्रयास हुए भी हैं. विगत छह फरवरी को मुख्यमंत्री ने लखीसराय आगमन पर कुछ जगहों पर पर्यटन की दृष्टि से विकास किये जाने की बात कही थी.

जिला के प्रमुख खोज स्थल :

लाली पहाड़ी :

लखीसराय स्थित लाली पहाड़ी पर पुरातत्व विभाग द्वारा करायी गयी खुदाई में बौद्ध काल से संबंधित अनेक अवशेष मिले हैं.

इनमें प्रमुख हैं : प्राचीन ईंटों से बने कई सारी संरचनाएं, बौद्ध भिक्षुओं के रहन-सहन के अवशेष, विभिन्न प्रकार की मूर्तियां और धार्मिक प्रतीक चिन्ह, उपयोग में लायी गयी मिट्टी के बर्तन और औजार

उरैन पहाड़ी :

सूर्यगढ़ा प्रखंड के कजरा थाना क्षेत्र अंतर्गत उरैन पहाड़ी पर भी खुदाई करायी गयी थी. जहां से भी कई प्रमाण प्राप्त हुए. इतना ही नहीं उरैन पहाड़ी पर पूर्व में देश से लेकर विदेश तक के कई सारे रिसर्च करने वाले आये और उरैन पहाड़ी का उन्होंने अपने लिखे किताबो में जगह दिया. कोलकाता के आर्कियोलाजिस्ट रूपेंद्र कुमार चटोपाध्याय द्वारा 30 वर्ष पूर्व सर्वे किया गया था, लेखक सह आर्कियोलाजिस्ट लॉरेंस ऑस्टिन वाडेल ने 1892 में लिखी अपनी पुस्तक ‘जनरल ऑफ द ऐसीएटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल’ में उरैन पहाड़ी का जिक्र किया. ‘साउथ एशियन स्टडीज’ के चैप्टर में प्रो दिलीप कुमार चक्रवर्ती व प्रो रूपेंद्र कुमार चट्टोपाध्याय ने उरैन का जिक्र किया. नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर, राव लिनरोथ ने यहां बौद्ध कला व वास्तुकला की खास शैली देखने की बात कही. वर्तमान में भी विदेश से कई सारे रिसर्च करने वाले उरैन पहाड़ी का निरीक्षण करने आये थे.

– पहाड़ी के पत्थरों पर कई जगह ब्राह्मी लिपि में लिखे शिलालेख, बौद्धकालीन शैली की शिल्पकला, बौद्ध धर्म से संबंधित वस्तुएं जैसे स्तूप अवशेष, प्रार्थना कक्ष का स्थल, विभिन्न प्रकार की मूर्तियां और धार्मिक प्रतीक चिन्ह, उपयोग में लायी गयी मिट्टी के बर्तन और औजार, बौद्ध भिक्षुओं के रहन-सहन के अवशेष मिले हैं.

संग्रहालय में अवशेष :

लखीसराय स्थित संग्रहालय में लाली पहाड़ी व उरैन पहाड़ी में खुदाई के दौरान प्राप्त महत्वपूर्ण अवशेषों को संरक्षित कर रखा गया है. इसमें खंडित स्तूप की संरचनाएं, कई धार्मिक प्रतिमाएं, धार्मिक प्रतीक चिन्ह, मिट्टी के बर्तन और औजार शामिल हैं. इन वस्तुओं को देखने के लिए स्थानीय लोग तो आते ही है. साथ ही इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और छात्रों का भी आना जाना लगा रहता है.

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