जल-जीवन-हरियाली को लेकर नहीं है नगर एवं जिला प्रशासन गंभीर

नदी के सूख जाने के कारण जल स्रोत समाप्त हो चुका है,

जल संकट का मंडरा रहा है खतरा, गर्मियों के दिनों में हो सकता है जल संकट पीएचईडी विभाग भी नहीं कर रहा कोई उपाय लखीसराय. जल-जीवन-हरियाली को लेकर नगर एवं जिला प्रशासन गंभीरतापूर्वक नहीं ले रहे हैं. इस बार भीषण गर्मी करने की पूर्व में ही मौसम विभाग द्वारा संकेत दिया जा रहा है, लेकिन जल-जीवन-हरियाली को लेकर पिछले वित्तीय वर्ष में जो कार्य किया गया है, वह ठप पड़ा हुआ है. वहीं पोखर, तालाब एवं जल स्रोत को जोड़ने वाली मुख्य धारा की किऊल नदी भी सूखता जा रहा है. किऊल नदी से शहर एवं गांव के जलधारा मुख्य स्रोत है, नदी के सूख जाने के कारण जल स्रोत समाप्त हो चुका है, पंचायत स्तर पर जल-जीवन-हरियाली को लेकर कई जगह पोखर एवं तालाब खोजने का कार्य सिर्फ कागज पर है, लेकिन कहीं भी पोखर एवं तालाब नहीं दिखाई दे रहा है. पूर्व के पोखर एवं तालाब का जीर्णोद्धार कर राशि निकाल ली गयी है. सदर प्रखंड के साबिकपुर पंचायत, अमहरा, मोरमा, बिलोरी, दामोदरपुर, महिसोना के साथ साथ सूर्यगढ़ा के रामपुर, सैदपुर, अलीनगर, मदनपुर समेत भी अन्य पंचायत के अलावा नगर परिषद लखीसराय एवं नप परिषद बड़हिया के विभिन्न वार्ड की जांच पड़ताल की जाय तो एक बड़े घोटाला सामने आ सकता है. प्रत्येक महीना जल जीवन हरियाली को लेकर चलता है बैठकों का दौर बता दें कि जिला में प्रत्येक महीने एक बैठक जल जीवन हरियाली को लेकर होती है. इतना ही नहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा विभागीय सचिव भी इसे लेकर मॉनिटरिंग करते हैं. बावजूद जिला मुख्यालय के आसपास के ही पोखरों का हाल बुरा दिखाई देता है. जिला मुख्यालय से सटे दामोदरपुर गांव में ही एक पोखर लंबे समय से विभागीय उदासीनता का शिकार बना हुआ है. स्थानीय लोगों की मानें तो उक्त पोखर का शायद ही किसी ने जीर्णोद्धार होता देखा हो. जल-जीवन-हरियाली को लेकर मनरेगा एवं अन्य योजनाओं से हो चुका है करोड़ों खर्च जल-जीवन-हरियाली को लेकर जिले में विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. जिसमें पेड़, पौधा, पोखर एवं जल संचय को लेकर कई पंचायत एवं वार्ड में काम किया जा चुका हैं, लेकिन लगभग सभी कार्य सिर्फ कागज पर ही है. जल संचय के लेकर सूखता आदि का भी निर्माण कराया गया है. सोखता का निर्माण आधा अधूरा कर राशि की निकासी कर ली गयी है. धरातल पर कार्य नहीं दिखाई दे रहा है. पंचायत स्तर की बात की जाय तो अधिकांश जगहों पर जितने भी सोख्ता बनाया गया है उसे सड़क किनारे बने नाला से जोड़ दिया गया है. पंचायत एवं वार्ड स्तर पर पेड़ पौधा नहीं लगाया गया है. जिससे कि जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है. जल संकट का सबसे बड़ा उदाहरण है किऊल नदी किऊल नदी में पूरी तरह धूल उड़ रही है. नदी में पानी नहीं रहने के कारण जल स्रोत का परेशानी आगामी दिन देखने को मिलेगा, मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिन भीषण गर्मी की आशंका जतायी जा रही है. जल स्रोत नहीं होने के कारण चापाकल, सबमर्सिबल आदि से पानी उगलना बंद हो सकता है. जिससे कि जल संकट की भारी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. खासकर पहाड़ी एवं मैदानी इलाकों में जल संकट की पूरी संभावना जतायी जा रही है. पीएचईडी विभाग द्वारा भी चापाकल मरम्मती एवं हर घर नल का जल योजनाओं को लेकर पूरी तरह उदासीन है. जिससे कि लोगों को पेयजल के साथ-साथ प्रतिदिन उपयोगी पानी की समस्या उत्पन्न हो सकती है बोले अधिकारी डीडीसी सुमित कुमार ने बताया कि जल-जीवन-हरियाली को लेकर कुल 15 विभागों द्वारा योजनाएं चलायी जाती है. अलग-अलग वर्ष में योजनाओं को क्रियान्वयन किया जाता है. पांच वर्ष पूरे होने के बाद ही अगली योजनाएं ली जाती है. उन्होंने कहा कि अभी तक 1067 योजनाएं की जा चुकी है. जिसका जिओ टैग किया गया है. उन्होंने कहा कि सभी योजनायें पोर्टल पर दिखायी दे रहा है. सभी योजनाओं को ऑनलाइन कोई भी व्यक्ति देख सकता है. उन्होंने कहा कि योजनाओं को पारदर्शिता के साथ किया जाता है. योजनाओं में गड़बड़ी होने पर उसकी जांच सुनिश्चित की जाती है. अगर कोई योजनाओं की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच की जाती है. साथ ही उस पर कार्रवाई भी की जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >