डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने किया राजकीय मां बाला त्रिपुर सुंदरी महोत्सव शुभारंभ

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रतिष्ठित मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर बड़हिया में गुरुवार की रात्रि एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना

उद्घाटन, दुर्गा सप्तशती नाट्य प्रस्तुति और भजनों ने बांधा समां

बड़हिया.

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रतिष्ठित मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर बड़हिया में गुरुवार की रात्रि एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना. बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा आयोजित राजकीय मां बाला त्रिपुर सुंदरी महोत्सव का भव्य आयोजन भक्त श्रीधर सेवाश्रम परिसर में संपन्न हुआ. यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्रीय आस्था और राज्य की प्राचीन परंपरा का गौरवमयी प्रदर्शन भी रहा. राजकीय गरिमा और आध्यात्मिक भाव का संगम कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य के डिप्टी सीएम सह स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा, डीएम मिथिलेश मिश्र, एडीएम सुधांशु शेखर, मंदिर कमेटी के सचिव जयशंकर प्रसाद सिंह उर्फ भादो बाबू, कोषाध्यक्ष मिथिलेश प्रसाद सिंह तथा नगर परिषद उपसभापति गौरव कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. कला एवं संस्कृति विभाग के प्रभारी पदाधिकारी विनोद प्रसाद के पर्यवेक्षण में कार्यक्रम की व्यवस्था सुव्यवस्थित रूप से की गयी थी. मंच संचालन की जिम्मेदारी प्रचार-प्रसार उपसमिति के सक्रिय सदस्य एवं शिक्षक पीयूष कुमार झा ने सफलतापूर्वक निभायी. कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के मुख्य पुजारी विनय झा एवं अमलेंदु कुमार द्वारा पारंपरिक स्वस्तिवाचन के साथ हुई, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा. डिप्टी सीएम ने कहा, बिहार की धरती ऋषियों-मुनियों और महान परंपराओं की भूमि रही है. मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर हमारे जिले की आत्मा है. सरकार इसे एक महत्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए संकल्पित है. इस महोत्सव के माध्यम से हम इस पावन धाम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर लाना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि पूर्व में डाक विभाग द्वारा मंदिर पर विशेष आवरण जारी किये जाने के दौरान जिले में सात प्रमुख महोत्सवों के आयोजन की योजना की घोषणा की गयी थी, जिसका यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. महोत्सव में पटना से आमंत्रित कला समूह द्वारा ””””दुर्गा सप्तशती”””” पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया. देवी दुर्गा की विभिन्न लीलाओं और राक्षसों पर विजय की कथाओं को रंगमंच पर जीवंत देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे. इसके पश्चात सुप्रसिद्ध भजन गायक सत्यम आनंद की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्ति-रस में डुबो दिया. उनके कंठ से निकले भक्ति गीतों पर श्रोता झूमते, गुनगुनाते और तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गुंजायमान होता रहा. उपमुख्यमंत्री ने मंच पर उपस्थित मंदिर कमेटी के सदस्यों, कलाकारों और आयोजन से जुड़े प्रमुख सहयोगियों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया. यह क्षण न केवल सामाजिक सराहना का प्रतीक बना, बल्कि कलाकारों के योगदान को राज्य स्तरीय मान्यता भी मिली. कार्यक्रम का समापन ”वंदे मातरम” के सामूहिक गान के साथ हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में राष्ट्रगान की ध्वनि से सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया. स्थानीय नागरिकों ने राज्य सरकार द्वारा इस तरह के आयोजन को ऐतिहासिक बताया. क्षेत्र के वरिष्ठजन और युवाओं ने महोत्सव को आस्था और संस्कृति के संगम की संज्ञा दी. श्रद्धालुओं का कहना था कि इस आयोजन ने मंदिर को नयी पहचान दिलायी है.

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