Success Story: लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड के नंदनामा गांव के दिव्यांग युवा हीरा कुमार ने साबित कर दिया कि सफलता के लिए शारीरिक मजबूती नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है. दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने मछली पालन को अपना व्यवसाय बनाया और आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव के कई किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.
धान-गेहूं छोड़ मछली पालन को बनाया रोजगार
नंदनामा गांव निवासी अमरेंद्र सिंह के छोटे पुत्र हीरा कुमार ने परंपरागत खेती से अलग रास्ता चुना. उन्होंने मत्स्य विभाग से संपर्क कर करीब एक एकड़ भूमि में तालाब की खुदाई कराई और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन शुरू किया. पहले ही वर्ष उन्हें अच्छा लाभ मिला, जिसके बाद उन्होंने इसे अपना स्थायी व्यवसाय बना लिया.
कोलकाता में लिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण
हीरा कुमार की लगन को देखते हुए मत्स्य विभाग ने उन्हें कोलकाता में 10 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा. आई केयर कैफ, कोलकाता में देश के प्रसिद्ध मत्स्य वैज्ञानिकों ने उन्हें आधुनिक मत्स्य पालन, पानी की गुणवत्ता की जांच, विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के पालन और बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया. विभाग की ओर से उन्हें पानी जांचने की किट और अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए गए.
प्रशिक्षण के बाद बढ़ाया कारोबार
प्रशिक्षण से लौटने के बाद हीरा ने गांव में 10 कट्ठा अतिरिक्त जमीन पर एक और तालाब बनवाया और पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन शुरू किया. बेहतर तकनीक अपनाने से उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. उनकी मेहनत का परिणाम यह हुआ कि आज वे क्षेत्र के सफल मत्स्य पालकों में गिने जाते हैं.
अब दर्जनों किसान अपना रहे हैं यह मॉडल
हीरा कुमार की सफलता से प्रेरित होकर नंदनामा गांव के कई किसान अब अपने खेतों या लीज पर ली गई जमीन में तालाब बनाकर मछली पालन कर रहे हैं. इससे गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.
'हौसला हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं'
हीरा कुमार कहते हैं कि जब उन्होंने खेत में तालाब खुदवाना शुरू किया था, तब कई लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोका था. लेकिन उन्होंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपने लक्ष्य पर डटे रहे. उनका मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन किया जाए तो किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ सकती है. वे किसानों को धान और गेहूं के साथ मछली पालन, मुर्गी पालन और बत्तख पालन जैसे वैकल्पिक व्यवसाय अपनाने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि सरकार प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराती है, जिसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए.
