पैसे की धमक और सिस्टम की चूक: जानें कैसे लखीसराय में बायोमेट्रिक टीम से मिलकर सॉल्वर गैंग ने NEET (UG) परीक्षा को बनाया 'मजाक'

NEET Re-Exam Scam: लखीसराय में देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी 2026' में सेंधमारी करने वाले एक अंतरराज्यीय मुन्नाभाई गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़े सुरक्षा घेरे और जैमर के बीच चल रही परीक्षा के दौरान दो परीक्षा केंद्रों और किऊल थाना क्षेत्र से 2 मेडिकल छात्रों (स्कॉलर्स) और बिकी हुई बायोमेट्रिक टीम के सुपरवाइजरों सहित कुल 30 आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया है.

लखीसराय से राजीव की रिपोर्ट

NEET Re-Exam Scam: बिहार के लखीसराय जिले से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं की शुचिता को तार-तार करने वाली एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है. रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित हुई ‘नीट यूजी’ (NEET UG) पुनर्परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर रहे एक अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग (मुन्नाभाई गिरोह) का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस और जिला प्रशासन ने त्वरित संयुक्त कार्रवाई करते हुए विभिन्न परीक्षा केंद्रों से परीक्षा दे रहे हाई-प्रोफाइल फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर्स), उनके मददगारों और पैसों के लालच में फर्जी एंट्री कराने वाली डिजिटल बायोमेट्रिक टीम के सदस्यों सहित कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस महा-फर्जीवाड़े को लेकर जिले के दो थानों में तीन अलग-अलग प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं.

तीन थानों में प्राथमिकी: जानें कहां से कितनी हुईं गिरफ्तारियां

  • कवैया थाना (कांड संख्या 244/26 व 245/26): इसके अंतर्गत हसनपुर उच्च विद्यालय केंद्र से 9 आरोपी और केआरके उच्च विद्यालय केंद्र से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
  • किऊल थाना (कांड संख्या 64/26): इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र और अन्य जगहों से कुल 14 शातिरों को दबोचा गया.

हसनपुर हाईस्कूल केंद्र — न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज का छात्र गिरफ्तार

हसनपुर उच्च विद्यालय के केंद्राधीक्षक मृत्युंजय कुमार को दोपहर करीब 12:30 बजे गुप्त सूचना मिली कि मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार (निवासी- नालंदा) के स्थान पर कोई दूसरा युवक परीक्षा देने केंद्र में प्रवेश करने की फिराक में है. केंद्राधीक्षक ने तुरंत वहां तैनात मजिस्ट्रेट प्राची कुमारी और पुलिस निरीक्षक विजय कुमार को अलर्ट किया. मुख्य द्वार पर एडमिट कार्ड और पहचान पत्रों की कड़ाई से भौतिक जांच शुरू की गई, जिसमें एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया.

लाखों की डील और बिकी हुई बायोमेट्रिक टीम

पूछताछ में पकड़े गए फर्जी परीक्षार्थी ने अपना नाम मंतोष कुमार (उम्र 26 वर्ष, निवासी- मधेपुरा) बताया. उसने कबूल किया कि वह न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फोर्थ ईयर (4th Year) का छात्र है. वह संजीत कुमार के रोल नंबर पर परीक्षा देने आया था.

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इस जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि बायोमेट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव और केंद्र पर तैनात सभी छह बायोमेट्रिक कर्मियों को मोटी रकम देकर पहले ही सॉल्वर गैंग ने अपने पाले में मिला लिया था. बायोमेट्रिक टीम के सुपरवाइजर बादल कुमार ने स्वीकार किया कि स्कॉलर मंतोष का फिंगरप्रिंट मूल डेटा से मिसमैच (अलग) था, इसके बावजूद टेंडर मालिक के कहने पर उन्होंने फर्जी तरीके से उसे परीक्षा हॉल के अंदर एंट्री दिला दी थी. पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बाहर मैदान में छिपे असली परीक्षार्थी संजीत और उसके बिचौलिए भाई रंजीत कुमार को भी खदेड़कर पकड़ लिया.

NEET Re-Exam Scam: केआरके हाईस्कूल केंद्र — कमरा नंबर 06 में पकड़ा गया मुजफ्फरपुर का MBBS छात्र

कवैया थाना अंतर्गत ही केआरके उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर भी शाम करीब 4:00 बजे एक फर्जी छात्र को रंगे हाथों परीक्षा देते पकड़ा गया. केंद्राधीक्षक विनय कुमार, स्टैटिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार और पुलिस अवर निरीक्षक अरुण कुमार ठाकुर ने भारी बल के साथ कमरा संख्या 06 में छापेमारी की.

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वहां रोल नंबर 1524104120 (परीक्षार्थी प्रभात अमन) की सीट पर बैठकर परीक्षा लिख रहे युवक से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने अपना असली नाम विवेक कुमार (निवासी: कांटी, मुजफ्फरपुर) बताया. विवेक एएन मगध मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है.

मैदान में इंतजार कर रहा था साथी, 25 मोबाइल जब्त

स्कॉलर विवेक की निशानदेही पर पुलिस ने केआरके मैदान की घेराबंदी कर उसके साथी अर्पित सिंह (निवासी: मुजफ्फरपुर) को भी दबोच लिया. विवेक ने खुलासा किया कि फिंगरप्रिंट मिलान फेल होने के बावजूद बायोमेट्रिक सुपरवाइजर विशाल कुमार और उसकी टीम ने पैसे लेकर उसे अंदर भेजा था. लखीसराय की एफएसएल (FSL) टीम ने मौके पर पहुंचकर जाली पहचान पत्र, एडिटेड एडमिट कार्ड और 4 पीस उपस्थिति टैब को सील कर दिया है. पुलिस ने बायोमेट्रिक कर्मियों के पास से 25 मोबाइल फोन बरामद किए हैं.

केंद्रीय विद्यालय केंद्र (किऊल) से गिरफ्तार हाई-प्रोफाइल स्कॉलर्स की सूची

किऊल थाना पुलिस और जिला प्रशासन ने केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से जिन फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर्स) को गिरफ्तार किया है, उनके नाम और शैक्षणिक प्रोफाइल बेहद चौंकाने वाले हैं:

  1. अमन अग्रवाल (पिता: राजीव अग्रवाल, नई दिल्ली) – यूसीएमएस दिल्ली (साहदरा) का एमबीबीएस इंटर्न छात्र.
  2. सौरभ झा (पिता: ललन झा, मधुबनी) – एम्स (AIIMS) रायबरेली का एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र.
  3. हिंमांशु कुमार (पिता: शिव नारायण साह, सुपौल) – जीएमसीएच मध्य प्रदेश का प्रथम वर्ष का एमबीबीएस छात्र.
  4. जितेंद्र कुमार (पिता: कारू राम, सवाई माधोपुर, राजस्थान) – एनएमसीएच (NMCH) पटना का मेडिकल छात्र.
  5. रौशन कुमार (पिता: जीवछ साह, मधुबनी) – एनएमसीएच (NMCH) पटना का बी-फार्मा चतुर्थ वर्ष का छात्र.
  6. पूनम कुमारी (पिता: बालेश्वर प्रसाद, गिरिडीह, झारखंड) – बीएचयू (BHU) वाराणसी की बीएससी नर्सिंग की छात्रा.
  7. चंचल कुमारी (पिता: सत्येंद्र प्रसाद, पलामू, झारखंड) – जीएस कॉलेज उड़ीसा की बीएएमएस की छात्रा.

NEET Re-Exam Scam: कड़े सुरक्षा घेरे और जैमर के बीच कैसे हुआ खेल?

प्रशासनिक कड़ियों के अनुसार, परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से ही प्रवेश दिलाना शुरू कर दिया गया था और 1:30 बजे एंट्री बंद कर दी गई थी. परीक्षा केंद्र पर तैनात सभी वीक्षकों और कर्मियों के मोबाइल सुबह 7 बजे ही जमा करा लिए गए थे और केंद्रों के पास इलेक्ट्रॉनिक जैमर भी लगाए गए थे ताकि मोबाइल या इंटरनेट काम न करे.

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इतने कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मियों की सीधी मिलीभगत ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह भेद दिया, जिसने प्रशासनिक मुस्तैदी पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

₹500 के मानदेय की आड़ में छिपी थी बड़ी साजिश

सॉल्वर गैंग के इस जाल में कई ऐसे स्थानीय युवक भी फंसे हैं जो महज ₹500 दैनिक मानदेय (पॉकेट मनी) के लालच में बायोमेट्रिक एजेंसी के जरिए परीक्षा केंद्रों पर काम करने आए थे. गिरफ्तार बायोमेट्रिक कर्मी विशाल कुमार के पिता संजय राम (वार्ड नंबर 31, कवैया) सहित अन्य परिजनों ने रोते हुए जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके बच्चे निर्दोष हैं और वे पढ़ाई करते हैं. उन्हें इस बात का जरा सा भी आभास नहीं था कि टेंडर मालिक प्रमोद यादव और मुख्य सरगना ने उनके पीछे इतनी बड़ी खूनी और विधिक साजिश रच रखी है. परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है.

“साइबर डीएसपी अजीत प्रताप सिंह चौहान और ट्रैफिक थानाध्यक्ष अजय कुमार को इन मामलों की गहन विधिक जांच सौंपी गई है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और केंद्र व राज्य सरकार के नए व बेहद सख्त ‘सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024’ (Public Examination Act 2024) की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस पूरे खेल का मुख्य मास्टरमाइंड रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट (पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र) और बायोमेट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव फिलहाल फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है.”

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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