शहर के चार स्थलों पर की जायेगी नमाज अदा, लोगों ने खरीदारी की पूरी

जिले भर में आज यानी शनिवार को बकरीद मनायी जायेगी, इसको लेकर बाजारों में खरीदारों की काफी भीड़ देखी जा रही है

बकरीद आज. शहर के पुरानी बाजार विद्यापीठ चौक, चितरंजन रोड, नया बाजार मुख्य बाजार व पचना रोड में बढ़ी चहलकदमी

लखीसराय.

जिले भर में आज यानी शनिवार को बकरीद मनायी जायेगी, इसको लेकर बाजारों में खरीदारों की काफी भीड़ देखी जा रही है. शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोग बकरीद त्योहार से जुड़े सामग्रियों की अपनी आर्थिक क्षमता व जरूरत के अनुसार खुलेमन से खरीदारी की. शहर के पुरानी बाजार विद्यापीठ चौक, चितरंजन रोड, नया बाजार मुख्य बाजार व पचना रोड में सहित अन्य मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बकरीद से जुड़े सामानों की खरीदारी को लेकर पूरे दिन चहल-पहल बढ़ी रही. बकरीद को लेकर एक सप्ताह पूर्व से मुसलमान भाइयों द्वारा तैयारी की जा रही थी तथा अपने-अपने जरूरत के हिसाब के कुर्बानी देने की बकरे की खरीदारी कर रहे थे. जिला वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मो सरफराज आलम ने बताया कि जिले चार पवित्र जगहों पर नमाज की अदा की जायेगी. सुबह 6:30 बजे इंगलिश मुहल्ला स्थित मस्जिद व बड़ी दरगाह, 7:15 बजे छोटी दरगाह ईदगाह व 7:30 बजे पचना रोड स्थित मस्जिद मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा नमाज पढ़ी जायेगी.

हजरत इब्राहिम के कुर्बानी की याद में मनायी जाती है बकरीद

छोटी दरगाह मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद अजहर ने कहा कि इस्लाम धर्म का पवित्र पुस्तक कुरान में बकरीद का स्पष्ट वर्णन है. माना जाता है कि अल्लाह ने एक दिन हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी. हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला लिया. अल्लाह का हुकूम मानते हुए हजरत इब्राहिम जैसे ही अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की गर्दन पर जबह करने गये, अल्लाह ने उसे बचाकर एक दुंबा (बकरे) की कुर्बानी दिलवा दी. उसी समय से इस्लाम धर्म में बकरीद मनाने का प्रचलन शुरू है. ईद-उल-अजहा यानि बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनायी जाती है. कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों व तीसरा गरीब के लिए. इस पर्व पर इस्लाम धर्म के लोक पाक-साफ होकर नये कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं. नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी देने की परंपरा शुरू होती है.

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Author: DHIRAJ KUMAR

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