सूर्यगढ़ा(लखीसराय) से राजेश गुप्ता की रिपोर्ट: नगर परिषद क्षेत्र के कटेहर गांव स्थित बाबा गौरीशंकर मंदिर धाम अपनी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्ता के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है. क्षेत्र में विशेष आस्था का केंद्र होने के बावजूद इस धाम को अब तक राजकीय पर्यटन सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है.
अर्द्धनारीश्वर स्वरूप और ऐतिहासिक अवशेषों का संगम
कटेहर का यह मंदिर धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां स्थापित शिवलिंग में भगवान शंकर का ‘अर्द्धनारीश्वर’ स्वरूप अंकित है, जो विरले ही देखने को मिलता है. मंदिर परिसर में भैरवनाथ की प्रतिमा के साथ-साथ खुदाई में अक्सर प्राचीन खंडित मूर्तियां और छोटे-छोटे शिवलिंग मिलते रहे हैं. इतिहासकारों के अनुसार, यहां प्राचीन हिंदू काल के सूर्यवंशी राजाओं के कई भग्नावशेष आज भी विद्यमान हैं, जो इस स्थल के गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं.
गंगा की धारा बदलने से बदल गया स्वरूप
ग्रामीणों और बुजुर्गों का कहना है कि प्राचीन काल में यह मंदिर उत्तरायण गंगा के तट पर अवस्थित था. कालांतर में गंगा की धारा बदलने के कारण मूल मंदिर नदी में विलीन हो गया, जिसके बाद वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया. मान्यता है कि यह स्थल कभी तांत्रिक साधना का भी बड़ा केंद्र हुआ करता था. गंगा की धारा दूर होने के बाद अब यह पवित्र स्थल किऊल नदी के किनारे स्थित है. यहाँ महाशिवरात्रि और सावन के महीने में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है.
अशोक धाम की तर्ज पर विकास की मांग
स्थानीय चेंबर अध्यक्ष आलोक अग्रवाल, सचिव प्रेम कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता विमल वर्मा ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है. उनका कहना है कि जिस तरह 70-80 के दशक में लखीसराय में मिले इंद्रदमनेश्वर महादेव (अशोक धाम) को जिला प्रशासन और सरकार ने विशेष महत्व देकर पर्यटन के तौर पर विकसित किया, वैसी ही पहल गौरीशंकर धाम के लिए भी होनी चाहिए. उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी पहचान खोती जा रही है.
ग्रामीणों ने लगाई सरकार से गुहार
स्थानीय निवासी विजय यादव और नागेश्वर यादव सहित दर्जनों ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिर को शीघ्र ही पर्यटन सूची में शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि यदि मंदिर परिसर का समुचित सौंदर्यीकरण और विकास कराया जाए, तो यह स्थल न केवल जिले बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सकता है. इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.
