राजभवन में क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन, मुंगेर विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. चंदन कुमार ने रखे विचार

विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन में मुंगेर विश्वविद्यालय के डॉ. चंदन कुमार ने हिंदी के प्रचार-प्रसार और उच्च शिक्षा में इसके महत्व पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में साहित्यकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित भी किया गया.

लखीसराय, हलसी. विश्व हिंदी परिषद की ओर से राजभवन के मंच पर आयोजित क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन सह सम्मान समारोह में हिंदी के प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे. सम्मेलन में मुंगेर विश्वविद्यालय की ओर से भी हिंदी भाषा के विकास और उच्च शिक्षा में इसके व्यापक उपयोग की आवश्यकता को मजबूती से रखा गया. राजकीय डिग्री कॉलेज, हलसी के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे. उन्होंने मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने विचार साझा किए.

हिंदी के वर्तमान स्वरूप और नई पीढ़ी से जुड़ाव पर चर्चा

सम्मेलन में हिंदी भाषा के वर्तमान स्वरूप, उसकी उपयोगिता और नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने की आवश्यकता पर गहन चर्चा की गई. वक्ताओं ने हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और बदलते समय के अनुरूप इसके विकास पर अपने विचार रखे. डॉ. चंदन कुमार ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है.

उच्च शिक्षा में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर जोर

डॉ. चंदन कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. विद्यार्थियों को हिंदी के माध्यम से ज्ञान, शोध और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर भाषा को और अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है.

राजभवन के मंच पर प्रतिनिधित्व को बताया गौरवपूर्ण

राजभवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर मुंगेर विश्वविद्यालय की ओर से अपने विचार रखने के अवसर को डॉ. चंदन कुमार ने गौरवपूर्ण बताया. उन्होंने हिंदी भाषा के विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भूमिका को आवश्यक बताया.

साहित्यकारों और शिक्षाविदों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान हिंदी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित भी किया गया. सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने हिंदी के उत्थान, प्रचार-प्रसार और इसके व्यापक उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए.

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By केशव कुमार

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