26 फरवरी तक 11 लाख से अधिक लाभुकों को 580 टीम के सहयोग से खिलायी जायेगी दवा

10 से 26 फरवरी तक जिले में चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन के तहत सर्वजन दवा सेवन अभियान का मंगलवार को सदर अस्पताल से समारोह पूर्वक विधिवत उद्घाटन किया गया.

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन का सदर अस्पताल से विधिवत उद्घाटन

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्वयं दवा का सेवन कर अभियान का किया शुभारंभ

चिकित्सक ने दवा खाने के बाद मामूली रूप से बीमार होने पर टेंशन नहीं लेने का दिया सलाह

बोले दवा पूरी तरह से सुरक्षित साइड इफेक्ट होने से दवा के काम करने की अधिक संभावना

लखीसराय. 10 से 26 फरवरी तक जिले में चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन के तहत सर्वजन दवा सेवन अभियान का मंगलवार को सदर अस्पताल से समारोह पूर्वक विधिवत उद्घाटन किया गया. अभियान का डीएस सह प्रभारी सीएस डॉ राकेश कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एके भारती, डीपीएम सुधांशु नारायण लाल, शालिनी कुमारी व अस्पताल प्रबंधक नंदकिशोर भारती सहित अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारी ने स्वयं दवा का सेवन कर शुभारंभ किया.

डीपीएम ने बताया कि कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जायेगा, इसमें आम लोग के साथ विशेष रूप से जीविका के सभी सदस्य को दवा खिलायी जायेगी. 14 दिन तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा का सेवन कराने के साथ अंतिम तीन दिन तक सभी स्कूल में बूथ लगाकर शिक्षक व बच्चों को दवा खिलायी जायेगी. डॉ राकेश कुमार ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवा पूरी तरह सुरक्षित है. रक्तचाप, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य रोग से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवा खानी हैं. दवा के खाने से किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता है, अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये, चक्कर जैसे लक्षण होते हैं तो यह शुभ संकेत है. इसका मतलब है कि हैं कि शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद है, दवा खाने के बाद मर रहा है. किसी लाभार्थी को दवा सेवन से किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है तो उससे निबटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पांस टीम तैनात किया गया है. जिला में 11 लाख 14 हजार 234 लाभार्थियों को 580 टीम के सहयोग डीईसी व अल्बेंडाजोल दवा का निर्धारित खुराक खिलाया जायेगा. स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर अपने सामने लाभुक को दवा खिलायेंगे. दवा का वितरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जायेगा. दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है. दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिला व गंभीर रूप से बीमार को दवा नहीं खाना है. डॉ एके भारती ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है. यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. डब्लूएचओ के अनुसार, फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक दिव्यांगता के प्रमुख कारण में से एक है. यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है. लगातार पांच साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेने से पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है. मौके पर डॉ आलोक कुमार, डॉ गोपाल कुमार, डॉ जुली कुमारी, डॉ संगीता राय, डॉ मणि भूषण कुमार, डॉ रोशन चिरंजीव, डॉ पंकज कुमार, पवन कुमार व मधु कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे.

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