हलसी( लखीसराय) से केशव कुमार की रिपोर्ट,
ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर शनिवार को हलसी प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के इलाकों में सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया. सोलह श्रृंगार करके नवविवाहिताओं समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने बरगद वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की और अखंड सुहाग की कामना कीपरंपरा और मान्यता
मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपनी तपस्या और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किया था. उसी पौराणिक परंपरा को निभाते हुए महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और कथा सुनती हैं. पूजा करने से पति के जीवन की बाधाएं दूर होने और घर में सुख-शांति व समृद्धि आने का विश्वास है.
पूजा विधि और उत्साह
शनिवार सुबह से ही महिलाएं नये परिधानों में सज-धजकर मौसमी फल, भीगा चना, पकवान, मिठाई, बांस का पंखा, मौली धागा और श्रृंगार सामग्री लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं. महिलाओं ने वृक्ष की परिक्रमा कर मौली लपेटी और कथा श्रवण किया. कई महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा, जबकि कुछ ने फलाहार करके व्रत पूरा किया.पंडित ने बताया महत्व
स्थानीय पंडित अमरेश पाण्डेय ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पीपल की तरह वट वृक्ष में भी मां लक्ष्मी का वास माना जाता है. सावित्री की तरह तप और निष्ठा से व्रत करने वाली महिलाओं को दीर्घायु और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वट सावित्री पूजा से घर में सुख-शांति बनी रहती है.वातावरण रहा भक्तिमय
हलसी बाजार स्थित वट वृक्ष के पास दिनभर महिलाओं की भीड़ रही. पूजा के दौरान सुहागिनों में विशेष उत्साह देखने को मिला. महिलाओं का कहना था कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और परिवार की मंगलकामना के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है.मौके पर वट वृक्ष के नीचे पूजा करते महिला प्रतिमा कुमारी, रौशनी राज,डोली कुमारी, श्रुति कुमारी, ज्योति कुमारी,रेखा देवी, खुशबू कुमारी एवं अन्य महिलाएं शामिल थीं
