लखीसराय जिले के बड़हिया प्रखंड अंतर्गत विस्तृत दियारा क्षेत्र में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने किसानों और पशुपालकों की कमर तोड़ दी है. लगातार तीसरे दिन गंगा के जलस्तर में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है. शुक्रवार को जलस्तर में करीब 6 इंच की तीव्र बढ़ोतरी होने से गंगा का बैकवाटर और मुख्य धारा का पानी खेतों में घुस गया है. इसके चलते खुटहा दियारा सहित पूरे इलाके में लहलहा रही हजारों एकड़ हरी सब्जियों की खड़ी फसल पूरी तरह जलमग्न होकर बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है. स्थानीय मंडियों में हरी सब्जियों की लाइफलाइन माने जाने वाले बड़हिया दियारा में अब किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. उधर, चारे के अभाव और पानी के फैलाव के कारण पशुपालक मवेशियों के साथ पलायन करने लगे हैं.
महीनों की गाढ़ी मेहनत पर फिरा पानी, नावों से सब्जियां निकालने की होड़
बड़हिया दियारा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी परवल, करेला, लौकी, कद्दू, नेनुआ और भिंडी की बंपर पैदावार के लिए पूरे प्रमंडल में विख्यात है:
- तैयार फसल हुई बर्बाद: किसानों का कहना है कि जब फसल पूरी तरह तैयार होकर तुड़ाई और बाजार भेजने की स्थिति में थी, ठीक उसी समय गंगा में आई उफान ने सब कुछ तबाह कर दिया.
- नावों का सहारा: पानी के और विकराल होने की आशंका को देखते हुए किसान छोटी-छोटी देशी नावों के सहारे कमर तक गहरे पानी में घुसकर जितनी भी कच्ची-पक्की सब्जियां तोड़ पा रहे हैं, उन्हें समेटकर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ला रहे हैं. जिन खेतों में 4 से 5 फीट तक पानी भर चुका है, वहां से उपज निकालना भी नामुमकिन हो गया है.
बाढ़ और कटाव का असर: मुख्य बिंदु एक नज़र में
| प्रमुख पहलू (Key Points) | वर्तमान स्थिति एवं प्रभाव (Current Status & Impact) |
| जलस्तर की स्थिति | लगातार तीसरे दिन वृद्धि, 24 घंटे में लगभग 6 इंच चढ़ा पानी |
| सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र | खुटहा दियारा, बीएनएम कॉलेज घाट एवं बड़हिया के निचले तटीय इलाके |
| प्रभावित फसलें | परवल, करेला, भिंडी, लौकी, कद्दू एवं अन्य मौसमी सब्जियां |
| बाजार पर असर | लखीसराय, शेखपुरा व आसपास की मंडियों में हरी सब्जियों की आवक व दामों पर सीधा प्रभाव |
| पशुपालकों का संकट | दियारा में चारागाह डूबे, हरे चारे की गंभीर किल्लत से पलायन शुरू |
पशुपालकों पर दोहरी मार: चारागाह डूबे, पलायन को मजबूर
बाढ़ के पानी के फैलाव से खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी गंभीर संकट छा गया है:
- हरे चारे की भारी किल्लत: खेतों और खाली पड़ी परती भूमि पर पानी फिर जाने से मवेशियों के लिए घास और हरा चारा पूरी तरह समाप्त हो गया है.
- सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख: कई पशुपालक अपने दुधारू पशुओं, बछड़ों और जरूरी गृहस्थी के सामान को नावों व ऊंचे मार्गों के सहारे दियारा से निकालकर बड़हिया नगर और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं.
निचले इलाकों में बढ़ा खतरा, बीएनएम कॉलेज घाट तक पहुंचा पानी
लगातार जलस्तर बढ़ने से बड़हिया नगर और प्रखंड के निचले रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का खतरा गहराने लगा है:
- घाटों पर पानी का फैलाव: बीएनएम कॉलेज घाट समेत गंगा किनारे के इलाकों में पानी का फैलाव तेजी से हो रहा है, जिससे दियारा और मुख्य कस्बे के बीच दैनिक आवागमन प्रभावित हुआ है.
- आने वाले 24 घंटे संवेदनशील: किसानों और ग्रामीणों की नजरें अब गंगा के मिजाज पर टिकी हैं. यदि जलस्तर में वृद्धि की यह रफ्तार नहीं थमी, तो बड़हिया दियारा की पूरी कृषि अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी.
