लखीसराय जिले के मेदनीचौकी क्षेत्र में किऊल नदी के जलस्तर में हो रही गिरावट के बीच कटाव का नया संकट खड़ा हो गया है.
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार को नदी के बाढ़ के पानी में करीब 10 इंच की कमी दर्ज की गई है, लेकिन नदी की मुख्य धारा का बहाव अत्यधिक तेज बना हुआ है. पानी के इस प्रचंड वेग के कारण हैवतगंज मोहनपुर नवटोलिया के समीप सुरक्षा तटबंध में तेजी से कटाव हो रहा है, जिससे पूरा बांध कमजोर पड़ने लगा है और इलाके के लोगों में दोबारा बाढ़ आने का खौफ फैल गया है.
जलस्तर गिरा पर बहाव बना काल: तटबंध की नींव पर सीधा प्रहार
किऊल नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने बताया कि जलस्तर नीचे जाने के दौरान मिट्टी कटने की गति काफी तेज हो जाती है:
- कमजोर पड़ता सुरक्षा तटबंध: मोहनपुर नवटोलिया के पास नदी की तेज लहरें सीधे सुरक्षा बांध की दीवारों से टकरा रही हैं, जिससे तटबंध की मिट्टी कटकर नदी में समा रही है.
- दहशत में तटवर्ती आबादी: स्थानीय निवासी रत्न यादव, रामविलास यादव, सुबोध यादव, गौतम यादव, मुकेश यादव, साहब यादव, राजो यादव, अजय कुमार तथा खावा राजपुर के पैक्स अध्यक्ष जयप्रकाश उर्फ जेपी ने बताया कि यदि इस कटाव को तुरंत नहीं रोका गया, तो तटबंध कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
प्रशासनिक अनदेखी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
मोहनपुर नवटोलिया और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव की स्थिति दिन-प्रतिदिन खतरनाक होती जा रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन या जल संसाधन विभाग की टीम ने अब तक मौके का जायजा नहीं लिया है:
- ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि अब तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी या इंजीनियर ने सुरक्षा तटबंध का मुआयना करने की जहमत नहीं उठाई.
- प्रशासन की इस बेरुखी के कारण ग्रामीणों में गहरा असंतोष है, क्योंकि बांध टूटने की स्थिति में मेदनीचौकी प्रखंड के कई रिहायशी गांव सीधे जलमग्न हो जाएंगे.
रोकथाम के लिए तत्काल फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू करने की मांग
स्थानीय नागरिकों और पैक्स अध्यक्ष ने जिला प्रशासन व जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है.
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- कटाव स्थल पर जियो बैग्स (Geo Bags), बालू की बोरियां और बोल्डर डालकर तुरंत सुरक्षात्मक फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू कराया जाए.
- नदी के जलस्तर में भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित वृद्धि से पहले इस संवेदनशील प्वाइंट को पूरी तरह मजबूत किया जाए, ताकि दियारा और तटवर्ती इलाकों को भीषण तबाही से बचाया जा सके.