चैती दुर्गा पूजा एवं छठ पूजा को लेकर शहर से लेकर गांव तक का हुआ भक्तिमय माहौल

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित यंत्र लगाकर मंत्रो उच्चारण के साथ पूजा अर्चना की जा रही है.

-छठ की गीत एवं दुर्गा पूजा के मंत्रोच्चारण से हुआ भक्तिमय माहौल -नवरात्रा को लेकर मंदिरों में संध्या में आरती करने के लिए महिलाओं की उमड़ रही भीड़ -बुधवार को कुष्मांडा एवं स्कंदमाता की हुई पूजा अर्चना लखीसराय. जिले में छठ एवं दुर्गा पूजा को लेकर शहर से लेकर गांव तक भक्ति में माहौल बना हुआ है. चैती दुर्गा पूजा को लेकर बुधवार को दो माता देवी की पूजा अर्चना की गयी है. बुधवार को मां कुष्मांडा एवं स्कंदमा मां की पूजा की गयी है. पूरे मंत्रों के साथ पूजा अर्चना की गयी. शहर के पुरानी बाजार के अलावा नयी बाजार में भी दुर्गा पूजा को लेकर पूरे भक्ति में का माहौल छाया हुआ है. इसके अलावे ग्रामीण क्षेत्रों में भी चैती दुर्गा पूजा मनाया जाता है. सूर्यगढ़ा के रामपुर सैदपुर के अलावे अन्य जगहों पर भी चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर मां दुर्गा का प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है. चैती दुर्गा पूजा का अब तक पांच पूजा हो चुकी है. पहले पूजा शैलपुत्री, दूसरी पूजा ब्रह्मचारिणी एवं तीसरे दिन चंद्रघंटा एवं चौथे दिन मां कुष्मांडा एवं स्कंदमाता की पूजा गयी है. दुर्गा पूजा को लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित यंत्र लगाकर मंत्रो उच्चारण के साथ पूजा अर्चना की जा रही है. शहर के पुरानी बाजार में चैती मां दुर्गा का प्रतिमा स्थापित नहीं की जाती है, जबकि नया बाजार में कई जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना एवं मेला का आयोजन किया जाता है. इसी तरह गांव गांव में भी मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है एवं प्रतिमा स्थापित कर दुर्गा पाठ एवं आराधना के साथ उनकी आरती की जाती है. निष्ठा एवं आस्था के पर्व छठ पूजा को लेकर भी भक्तिमय का है माहौल निष्ठा एवं आस्था के पर्व छठ पूजा को लेकर भी नेम धर्म के साथ पूजा अर्चना की जा रही है. चार दिवसीय छठ पूजा के दूसरे दिन बुधवार को खरना पूजा की गयी है. बताया जा रहा है कि इस दिन भी छठ पूजा का काफी महत्व रखता है. व्रतियों के द्वारा बुधवार को अपने-अपने परंपरा के अनुसार कही गुड़ चावल तो कहीं दूध में चावल डालकर खीर बनाया जाता है एवं रोटी में देसी घी लगाकर पूजा अर्चना की जाती है. इस पूजा में एक दूसरे को प्रसाद खिलाने के लिए आमंत्रित भी किया जाता है. शाम को अपने दोस्तों एवं परिजनों के बीच प्रसाद का वितरण किया जाता है. गुरुवार को प्रथम अर्घ्य दिया जायेगा. गुरुवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. वहीं शुक्रवार को सुबह के अर्घ्य के साथ छठ संपन्न किया जायेगा. बोले आचार्य पंडित आचार्य परमानंद पांडे ने बताया कि छठ पूजा का विशेष महत्व है. जिसमें साफ सफाई के साथ आस्था भी जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि वह चैती छठ पूजा में यह आश्चर्यजनक है कि दुर्गा पूजा शुरू होने के बाद ही चैती दुर्गा एवं छठ पूजा के साथ रामनवमी का भी पूजा की जाती है. यह एक भारी संयोग है. इस संयोग को सबको पालन करना चाहिए. यहां पर छठ पूजा, रामनवमी एवं दुर्गा पूजा एक साथ होना एक अलग-अलग पाठ कर्म है. कर्म निभाना ही पाठ कर्म है.

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