लखीसराय अशोक धाम हादसा जांच रिपोर्ट: अफवाह और दो सरकारी विभागों की बड़ी लापरवाही ने ली 7 महिला श्रद्धालुओं की जान; रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा

अशोक धाम में हुई भगदड़ हादसे की जांच रिपोर्ट अब सामने आ गई है. इस रिपोर्ट में बिजली विभाग और भवन प्रमंडल की गंभीर लापरवाही को उजागर किया गया है, जिसके कारण 7 महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई. जानें हादसे के पीछे की पूरी कहानी.

लखीसराय. अशोक धाम में तीसरी सोमवारी को हुए भगदड़ हादसे की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार को सौंप दी है. एडीएम नीरज कुमार के नेतृत्व वाली टीम में एसडीओ प्रभाकर कुमार और एसडीपीओ शिवम कुमार शामिल थे. जांच के दौरान अशोक धाम हॉल्ट के स्टेशन मास्टर समेत कई अधिकारियों से पूछताछ की गई और घटनास्थल से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई.

ट्रेन रुकने के बाद शुरू हुई अफरा-तफरी

जांच रिपोर्ट के अनुसार अशोक धाम हॉल्ट से मेला स्पेशल ट्रेन के रवाना होने के बाद विक्रमशिला एक्सप्रेस को स्टेशन पहुंचने से पहले वैक्यूम कर रोक दिया गया. ट्रेन रुकते ही कई यात्री नीचे उतरकर मंदिर की ओर जाने वाली कतार में शामिल होने के लिए धान के खेत की तरफ बढ़ने लगे.

इसी दौरान बिजली के तार से करंट लगने की अफवाह फैल गई. खेत की तरफ लोगों को तेजी से भागते देखकर कतार में खड़े अन्य श्रद्धालुओं को लगा कि भगदड़ शुरू हो गई है. इसके बाद अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गयी.

धान के खेत में गिरने और दबने से हुई मौतें

अफरा-तफरी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धान के खेत की ओर भागे. इस दौरान कई लोग गिर गए और भीड़ के दबाव में दब गए. हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए. धक्का-मुक्की के दौरान एसएसबी के जवान भी भीड़ में दब गए थे, जिन्हें बाद में सुरक्षित बाहर निकाला गया.

बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

जांच रिपोर्ट में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार घटना से करीब 20 दिन पहले बिजली का पोल गिरने वाले स्थान के आसपास मिट्टी का कटाव हो चुका था. इसके बावजूद स्थिति को दुरुस्त नहीं कराया गया.

जांच टीम ने माना कि कमजोर जमीन और आसपास की स्थिति हादसे के दौरान गंभीर खतरा पैदा करने वाले कारकों में शामिल रही.

जर्जर बैरिकेडिंग को लेकर भवन प्रमंडल पर सवाल

रिपोर्ट में भवन प्रमंडल की ओर से बैरिकेडिंग व्यवस्था में कथित लापरवाही का भी उल्लेख किया गया है. सावन की प्रत्येक सोमवारी से पहले बैरिकेडिंग को दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जांच के अनुसार इसका अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ.

तीसरी सोमवारी को भीड़ का दबाव बढ़ने के बाद कमजोर जमीन के कारण बिजली का पोल और जर्जर बैरिकेडिंग के ढहने की स्थिति बनी, जिसके बाद अफवाह और भ्रम ने भगदड़ का रूप ले लिया.

दो बिंदुओं पर जांच अभी बाकी

एसडीओ प्रभाकर कुमार ने बताया कि अधिकांश बिंदुओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है. हालांकि दो विशेष बिंदुओं पर जांच अभी लंबित है. सावन की चौथी सोमवारी और पूर्णिमा पर्व समाप्त होने के बाद इन दोनों बिंदुओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा.

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ा जोर

तीसरी सोमवारी की घटना के बाद प्रशासन ने अशोक धाम में भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है. आगामी धार्मिक आयोजनों के दौरान ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है.


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By राजेश कुमार

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