लखीसराय. जिला स्वास्थ्य समिति, लखीसराय के तत्वावधान में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत जिले के सभी प्राथमिक, सामुदायिक एवं रेफरल अस्पतालों में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया की पहचान, उपचार और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई. अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोर-किशोरियों और बच्चों में एनीमिया की दर कम करना तथा मातृ-शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी नियंत्रण करना है.
सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुआ प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम सिविल सर्जन सह जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव डॉ. जयप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ. इसमें डीआईओ, डीपीएम, डीपीसी, डीसीएम सहित स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद रहे. प्रशिक्षण के दौरान जिले में एनीमिया की रोकथाम और प्रभावित लोगों तक समय पर उपचार पहुंचाने को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.
एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं को दी गई जानकारी
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया की पहचान, त्वरित उपचार और सामुदायिक जागरूकता के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय भूमिका से एनीमिया के मामलों की समय पर पहचान और उपचार संभव होगा.
मां और नवजात दोनों के लिए खतरनाक है एनीमिया
डॉ. भारती ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की कमी मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है. गंभीर एनीमिया की स्थिति में प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम बढ़ जाता है. इससे मातृ मृत्यु का खतरा भी बढ़ सकता है. इसके अलावा महिला में कमजोरी बढ़ने और संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होने की आशंका रहती है. उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला में खून की कमी से समय से पहले प्रसव, जन्म के समय बच्चे का कम वजन तथा बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है.
टी4 रणनीति के तहत नियमित जांच पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को अपने-अपने क्षेत्रों में टी4 रणनीति का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया. इसके तहत गर्भवती महिलाओं और किशोर-किशोरियों की डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से नियमित जांच करने पर जोर दिया गया. हीमोग्लोबिन स्तर के अनुसार आयरन एवं फॉलिक एसिड की गोलियां या सिरप उपलब्ध कराने तथा गंभीर मामलों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर करने के निर्देश दिए गये.
पौष्टिक आहार और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की अपील
स्वास्थ्यकर्मियों को महिलाओं और किशोरियों को पौष्टिक आहार के प्रति लगातार जागरूक करने को कहा गया. हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, चना और सहजन जैसे पोषक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने की सलाह देने पर जोर दिया गया. इसके साथ स्वच्छता के प्रति भी लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए.
पूरी तरह स्वस्थ होने तक होगी निगरानी
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मरीज को केवल एक बार उपचार उपलब्ध कराकर छोड़ना नहीं है. स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज की डिजिटल और भौतिक रूप से लगातार निगरानी करने तथा पूरी तरह स्वस्थ होने तक उपचार और परामर्श की प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया गया. इससे एनीमिया के मामलों में उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
