लखीसराय में अभयपुर रेलवे दुर्गा मंदिर में माथा टेकते हैं यात्री, आस्था और सुरक्षित यात्रा का अनोखा संगम

Aaj Ka Darshan: लखीसराय में ट्रेन रुकते ही दुर्गा मंदिर में पहुंचते हैं श्रद्धालु, अभयपुर स्टेशन की आस्था ने बनाई अलग पहचान

Aaj Ka Darshan: पीरी बाजार (लखीसराय) से रवि राज आनंद की रिपोर्ट — पूर्व रेलवे के मालदा मंडल अंतर्गत अभयपुर रेलवे स्टेशन परिसर के समीप स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर आज श्रद्धा और विश्वास का बड़ा केंद्र बन चुका है. रेलकर्मियों, यात्रियों और आसपास के ग्रामीणों की गहरी आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है. स्टेशन से सटे इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां से गुजरने वाले कई यात्री सुरक्षित यात्रा की कामना के साथ माता के दरबार में शीश झुकाना नहीं भूलते.

रेलवे स्टेशन के पास बसा आस्था का केंद्र

अभयपुर रेलवे स्टेशन के सामने स्थित यह दुर्गा मंदिर वर्षों पुराना माना जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास इलाके की धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है. स्टेशन के समीप होने के कारण यहां दिनभर श्रद्धालुओं और यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है.

ट्रेन के लोको पायलट, रेल कर्मचारी और दैनिक यात्री मंदिर के सामने हाथ जोड़कर अपनी यात्रा की सफलता और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास का प्रतीक बन गया है.

नवरात्रि में सजता है भव्य मेला

अभयपुर दुर्गा मंदिर की सबसे बड़ी पहचान शारदीय नवरात्रि के दौरान होने वाले विशेष आयोजन हैं. इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है और पूरे इलाके का माहौल भक्तिमय हो जाता है.

महाअष्टमी और महानवमी के अवसर पर यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें आसपास के कई गांवों के लोग शामिल होते हैं. पूजा आयोजन में रेल प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय ग्रामीण मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ट्रेन रुकते ही मंदिर पहुंचते हैं यात्री

भागलपुर-किऊल रेलखंड से गुजरने वाले कई श्रद्धालु अभयपुर स्टेशन पर उतरते ही सीधे मंदिर पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई यात्री यात्रा शुरू करने से पहले और यात्रा पूरी होने के बाद माता के दर्शन अवश्य करते हैं.

मंदिर परिसर में सुबह और शाम आरती के समय विशेष भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है. घंटियों और जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठता है.

सामाजिक एकता की भी मिसाल

स्थानीय निवासियों के अनुसार यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है. यहां हर साल पूजा को भव्य बनाने में ग्रामीण और रेल प्रशासन मिलकर सहयोग करते हैं, जिससे क्षेत्र में आपसी भाईचारा और मजबूत होता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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