गरमी आते ही बढ़ी अगलगी की घटनाएं

लखीसराय : गरमी का महीना आते ही अगलगी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. चूल्हे की चिनगारी, थ्रेसर से निकली चिनगारी व विद्युत शार्ट सर्किट से जगह-जगह आग लगने की घटनाएं हो रही है. अकेले मार्च महीने में जिले में अगलगी की दो दर्जन से अधिक घटनाएं हुई. अग्निशमन विभाग के पदाधिकारी देवकी पासवान […]

लखीसराय : गरमी का महीना आते ही अगलगी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. चूल्हे की चिनगारी, थ्रेसर से निकली चिनगारी व विद्युत शार्ट सर्किट से जगह-जगह आग लगने की घटनाएं हो रही है. अकेले मार्च महीने में जिले में अगलगी की दो दर्जन से अधिक घटनाएं हुई. अग्निशमन विभाग के पदाधिकारी देवकी पासवान मुताबिक मार्च माह में अगलगी की 21 घटनाओं में बचाव कार्य किया गया. इसके पूर्व जनवरी माह में पांच व फरवरी माह में आठ अगलगी की घटनाओं में दमकल द्वारा बचाव कार्य किया गया.

पानी के लिए तरस रहे लोग
लखीसराय : गरमी शुरू होते ही प्रकृति ने जन-जीवन पर अपना कहर बरसाना शुरू कर दिया है. कहा गया है कि जल ही जीवन है. पृथ्वी पर जल नहीं होता तो यह संसार भी नहीं होता. उसी पानी को लेकर लोग सोच में पड़ गये हैं. आदमी तो किसी तरह अपना काम चला ले सकता है,
लेकिन पशु पालकों के लिये बड़ी मुश्किल होगी. उसे अभी से ही सोचना पड़ रहा है. किऊल नदी किनारे बसे रहने के बावजूद भी काली, लाली पहाड़ी सहित प्रखंड कार्यालय का जल स्तर नीचे चला गया. कुछ लोगों का कहना है कि जब नदी में बालू ज्यादा हुआ करता था तो ऐसी नौबत कभी नहीं आयी.
लेकिन जैसे-जैसे गांव के आसपास से बालू हटता गया, यहां का जलस्तर घटता गया. सिर्फ अभी हथिया चापाकल थोड़ा बहुत पानी दे रहा है. इस संबंध में पीएचडी कार्यपालक अभियंता बिनोद कुमार ने कहा कि स्थिति को देख कर जो चापाकल ठीक होने लायक रहेगा. उसे पीएचइडी विभाग से ठीक कराया जायेगा, पानी के लिये हर संभव व्यवस्था की जायेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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