परेशानी. गरमी आते ही सूखने लगे जिले के ताल-तलैया पेयजल संकट गहराया

गरमी का मौसम आते ही जिले में पेयजल संकट गहरा गया है. दर्जनों गांव में स्थित ताल-तलैया में कुछ तो सूख गये हैं और कुछ सूखने के कगार पर हैं. वहीं जल स्तर नीचे चले जाने से कई चापाकल फेल हो गये हैं, अधिकतर कुआं का पानी भी काफी नीचे चला गया है. विद्यालय में […]

गरमी का मौसम आते ही जिले में पेयजल संकट गहरा गया है. दर्जनों गांव में स्थित ताल-तलैया में कुछ तो सूख गये हैं और कुछ सूखने के कगार पर हैं. वहीं जल स्तर नीचे चले जाने से कई चापाकल फेल हो गये हैं, अधिकतर कुआं का पानी भी काफी नीचे चला गया है. विद्यालय में भी छात्रों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है.

कजरा : कजरा थाना अंतर्गत उरैन पंचायत व बुधौली बनकर पंचायत के दर्जनों गांव में स्थित ताल-तलैया में कुछ तो सूख गये हैं और कुछ सूखने के कगार पर हैं. वहीं कई चापाकल फेल हो गये हैं, तो कुएं का जल स्तर भी काफी नीचे चला गया है. विद्यालयों के चापाकल से कम पानी आता है. मध्य विद्यालय शोभनी के प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय दास ने बताया कि उनके विद्यालय में 365 बच्चे का नामांकन है और मात्र एक चापाकल है. गरमी के कारण जल स्तर गिर गया है और चापाकल का पानी रूक कर मुश्किल से आता है. वहीं वसुआर निवासी मुकेश यादव, सुभाष यादव आदि ने बताया कि उनके गांव में कहने को तो करीब आधा दर्जन चापाकल हैं, जिसमें एकाध को छोड़ कर सब खराब है.
करीब एक हजार की आबादी वाले गांव में 60 प्रतिशत मवेशी पालक हैं. जो पानी के अभाव के चलते अपने मवेशी को लेकर खगडि़या जिले के फरकिया में गंगा के किनारे पलायन कर गये हैं, तो ग्रामीणों के सामने दो किलोमीटर दूर से एकमात्र कुएं से पानी लाने की मजबूरी है. बेशक हर साल ही पीएचइडी विभाग के द्वारा टैंकलोरी से पानी भिजवाया जाता है, पर यह आवश्यकता से कम पड़ जाता है. इस बार अब तक टैंकलोरी सेवा चालू नहीं की गयी है.
बताया गया कि 2015में मीनी जलापूर्ति योजना के तहत शिव मंदिर काली स्थान के नवकाडीह पोखर के पास बोरिंग कराने की प्रक्रिया की गयी थी, परंतु कार्य अधूरा छोड़ कर कर्मी चले गये और ग्रामीणों को जल संकट से आज भी दो चार होना पड़ रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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