भयमुक्त वातावरण में पर्यटक ले सकेंगे भीमबांध का आनंद

भयमुक्त वातावरण में पर्यटक ले सकेंगे भीमबांध का आनंद लक्ष्मीपुर. प्राकृतिक छटाओं से भरपूर गर्म जल कुंड के लिए मशहूर भीमबांध जंगल सर्द भरी मौसम में पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती है. बताते चलें कि 5 जनवरी 2005 में मुंगेर जिले के एसपी केसी सुरेंद्र बाबू सहित सात पुलिस जवानों को नक्सलियों ने […]

भयमुक्त वातावरण में पर्यटक ले सकेंगे भीमबांध का आनंद लक्ष्मीपुर. प्राकृतिक छटाओं से भरपूर गर्म जल कुंड के लिए मशहूर भीमबांध जंगल सर्द भरी मौसम में पर्यटकों को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती है. बताते चलें कि 5 जनवरी 2005 में मुंगेर जिले के एसपी केसी सुरेंद्र बाबू सहित सात पुलिस जवानों को नक्सलियों ने भीमबांध जंगल में बारूदी सुरंग विस्फोट कर मौत के घाट उतार दिये जाने के बाद यह क्षेत्र वीरान हो गया था और यहां आम लोगों के बजाय नक्सलियों का जमावड़ा हो गया. वर्ष 2013 के पूर्व तक यह क्षेत्र नक्सलियों का सैफ जोन बना रहा और नक्सलियों ने वन विभाग द्वारा बनाये गये केफटेरिया भवन,गेस्ट हाउस सहित कई भवन को ब्लास्ट कर क्षतिग्रस्त कर दिया था. लेकिन जुलाई 2013 में सीआरपीएफ पुलिस की कैंप स्थापना के बाद लोगों में सुरक्षा को लेकर पुन: विश्वास कायम होने के बाद फिर से भीमबांध पर्यटको से गुलजार होने लगा है. बताते चले कि नव वर्ष के प्रथम दिन जमुई,मुंगेर,लखीसराय,नवादा समेत झारखंड राज्य के सीमावर्ती जिले से भी पर्यटक भीमबांध पहुंच कर पिकनिक मनाते हैं. जिसे लेकर भीमबांध निवासियों में भी इस बार काफी उत्साह है. पर्यटकों को हैप्पी न्यू ईयर कह कर अभिवादन करने के लिए अभी से ही यहां के युवा व ग्रामीण तैयार है. पिकनिक में आये शराबियों पर रहेगी पुलिस की नजर भीमबांध आये पर्यटकों के सुरक्षा के बाबत हमारे जबान मुस्तैदी से रहेगें. इस बाबत जानकारी देते हुए बताया सीआरपीएफ भीमबांध के असिस्टेंट कमांडेंट एस जैकसन ने बताते हैं कि पर्यटन स्थल पर शराब पीने और शराब पीकर उत्पात मचाने वाले लोगाों पर हमारे जवान कड़ी नजर रखेंगे. यहां आने वाले कोई भी लोग अपने वाहन में शराब लेकर ना आये और आने वाले सभी लोग अपना-अपना पहचान पत्र लेकर ही जंगल में प्रवेश करें. वाहन को धीमी गति में चलाकर प्रवेश करे. जंगली जानवर को किसी भी सूरत में क्षति ना पहुंचाये. कुण्ड क्षेत्र के 500 मीटर के अंदर में ही रह कर आने वाले पर्यटक लुत्फ उठाये और जंगल के अंदर किसी भी सूरत में ना जायें. शाम 4 बजे तक लोग जंगल को खाली कर घर लौट जाये.

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