लखीसराय : 11वीं व 12वीं सदी में लखीसराय धार्मिक, राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था का केंद्र बिंदु था. उक्त बातें गुरुवार को लखीसराय के लाल पहाड़ी चौक पर पंतजलि केंद्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय शांति निकेतन के पूरातत्व विभाग के प्रो डॉ अनिल कुमार सिंह ने प्रेसवार्ता में कही.
उन्होंने कहा कि बलगुदर से रजौना के टील्हे से जो अवशेष प्राप्त हुआ है उसमें धर्मपाल व रामपाल के शासनकाल से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार इस क्षेत्र को क्रिमीनीला नगरी के नाम से जाना जाता था. बौद्धग्रंथ व पुरान में क्रिमीनीला का नाम मिलता है. उन्होंने बताया कि बुद्ध 11-13 व 19 वर्ष में बरसात के दिनों में यहां रहकर अपने शिष्यों के बीच प्रवचन करते थे.
क्योंकि लाल पहाड़ी के नीचे वृंद्धावन गांव में राजा अशोक की स्तूप का अर्घा मिला है. उन्होंने कहा कि मौर्य काल व गुप्त काल के बाद यह क्षेत्र राजनीतिक काल में रहा है. कहा कि तिब्बत में बुद्ध की मूर्ति लखीसराय से बनकर जाता था.
लखीसराय के बारे में देश-विदेश के जाने-माने दो दर्जन से अधिक इतिहासकारों ने अपने आलेख लिख चुके हैं. जो सिक्का लाल पहाड़ी पर मिला है वह अलाउद्दीन खिलजी वंश का सिक्का है.
जिसकी राष्ट्रीय अभिलेख के निदेशक डॉ संजय गर्ग के बाद कैंब्रिज विव के सिक्का शास्त्री प्रो सैयद एजाज ने पहचान की है. इस मौके पर रवि विलोचन वर्मा, अमर तिवारी सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे.
